नेता जी के खबरी की नहीं ले रहा कोई खबर
जरा याद करो कुर्बानी
आजाद हिंद फौज के डाकिया रहे तिलकू प्रजापति की हालत खराब
अमर उजाला ब्यूरो
जखनिया। जीवन के अंतिम पड़ाव में आ चुके आजाद हिंद फौज के सिपाही तिलकू प्रजापति का हालचाल लेने वाला आज कोई नहीं है। वह नेताजी सुभाषचंद्र बोस की सेना में डाकिया का काम करते थे तथा कई प्रकार के संकट को झेलते हुए क्रांतिकारियों की खबरें पहुंचाने का काम करते थे। इन दिनों वह कई गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। उन्हें इस बात का मलाल है कि देश को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने के बावजूद देश में उनकी चिंता करने वाला कोई नहीं है।
जखनिया क्षेत्र के हथियाराम गांव निवासी तिलकू प्रजापति पर 1942 की क्रांति ने ऐसा असर डाला कि वह देश की आजादी के दीवाने हो गए। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आह्वान पर 22 वर्ष की अवस्था में घर-बार छोड़ कर आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। इन्हें डाक वितरण का काम मिला। तिलकू क्रांतिकारियों की खबरों के आदान-प्रदान का काम किया करते थे। उन दिनों यह बड़ा जोखिम भरा काम था। कई बार अंग्रजों से बचने के चक्कर में जान पर बन आती थी। अपनी सेवा के दौरान काफी समय तक कोलकाता में काम किया। इसके साथ ही दिल्ली, मुंबई, चेन्नई सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी आना-जाना लगा रहा। आजादी के बाद आजाद हिंद फौज समाप्त हो गई। बाद में पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने आजाद हिंद फौज के जवानों को पूर्व सैनिक का दर्जा देते हुए सौ रुपये प्रति माह की मासिक पेंशन जारी की। सरकार ने इसे बदल कर तिलकू को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बना दिया और पेंशन को बढ़ा कर छह हजार रुपये प्रति माह कर दी गई है। इस महंगाई के दौर में यह रकम नाकाफी है। करीब सौ वर्ष के उम्र की दहलीज पर पहुंचे तिलकू कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इससे यह पेंशन राशि काफी कम पड़ जाती है। पैर में बीमारी की वजह से बमुश्किल अपनी दिनचर्या कर पाते हैं। मुलाकात के दौरान वह आजादी के दिनों को याद कर आज भी जोश में आ जाते हैं। उन्होंने काफी तकलीफ भरी स्थिति में कहा कि आज अपराधी, माफिया, भ्रष्टाचारियों से तो लोग हाल-चाल लेने जाते हैं लेकिन आजादी के दीवानों, क्रांतिकारियों और आजाद हिंद फौज के जवानों को भुला दिया गया है। कहा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी को तिरंगा फहरा लेना, मिठाइयां बांटकर खा लेना ही आजादी के मायने नहीं हैं। आजादी के मायने यह है कि हम अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। सबका यथोचित सम्मान करें। तमाम राजनीतिक आंदोलनों के भागीदारों तक को मोटी रकम में पेंशन, मेडिकल कार्ड, यात्रा कार्ड सहित तमाम सुविधाएं प्रदान की जाती हैं वही देश को आजाद कराने के लिए घर बार छोड़ कर राष्ट्र के लिए न्यौछावर हो जाने वाले जवानों को भुला देने से तिलकू दुखी हैं।