भांवरकोल। क्षेत्र के भदौरा गांव में बाबा भदेश्वरनाथ का मंदिर आस्था का प्रतीक बना हुआ है। पांच भाइयों की परिक्रमा के क्रम में इस शिवलिंग का महत्व सर्वाधिक है। इस परिक्रमा के तहत भदेश्वरनाथ जी के साथ चितबड़ागांव के कारों गांव के कामेश्वर महादेव, बलिया के बालेश्वर, भरौली के निकट अमांव गांव के ओमेश्वरनाथ और ब्रम्हपुर (बिहार) में बरमेश्वर महादेव पर जलाभिषेक किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के मास में इन सभी पांच भाइयों का जलाभिषेक करने पर अनंत फल मिलता है तथा व्यक्ति की मनोकामना अवश्य पूर्ण हो जाती है।
किंवदंतियों के मुताबिक भदौरा गांव पहले पूरी तरह से जंगल था। प्राचीनकाल में यहां पेड़ काटते समय एक लकड़हारे की कुल्हाड़ी जमीन पर गिर गई। इससे तेज आवाज हुई तथा कुल्हाड़ी पर भी खून के धब्बे दिखाई देने लगा। लोगों की मदद से उस स्थान को साफ किया गया जहां यह शिवलिंग प्रकट हुआ। आज भी इस शिवलिंग के ऊपरी भाग कटा हुआ है। बाद में वहां मंदिर की स्थापना की गई। पूरे क्षेत्र के लिए यह मंदिर आस्था का प्रतीक बना हुआ है। बिहार प्रांत के ब्रम्हपुर मंदिर के इतिहास के क्रम में पंच महादेवों में इस भदेश्वरनाथ मंदिर की महिमा का बखान किया गया है। सावन के महीने में अधिकतर लोग एक ही दिन में इन मंदिरों में जा कर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर से जुड़े पंडित आनंद त्रिपाठी ने बताया कि पिछड़ा गांव होने के कारण अभी इस मंदिर की तरफ अधिकारी या जन प्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं जिससे यह उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। ग्रामीणों की ओर से यहां समय समय पर विशेष पूजा अर्चना के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।