गाजीपुर। मौसम की तल्खी कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। आलम यह है कि लाख जतन करने के बाद भी एक पल के लिए भी चैन नहीं मिल पा रहा है। मौसम के सितम से हर कोई बेहाल है। धूप की वजह से सड़कों पर नाममात्र का ही चहल-पहल दिखाई दे रहा है। वहीं लोग आवागमन करते नजर आ रहे हैं, जिनकी कुछ मजबूरी है। मौसम की मार से बेहाल और परेशान लोगों में इस बात की चर्चा हो रही है बारिश का मौसम आने के बाद ही गर्मी से छुटकारा मिलेगा।
मार्च माह के शुरुआत से ही मौतम की तल्खी शुरु हो गई थी। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे मौसम की तल्खी में भी वृद्धि होती गई। हालांकि इस बीच दो-तीन बार मौसम का मिजाज बदला और आंधी के साथ ही हल्की बारिश भी हुई थी, जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत भी मिली थी, लेकिन मई माह की शुरुआत से धूप का जबरदस्त प्रभाव बना हुआ है। इससे जन-जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। धूप का हाल यह है कि दोपहर की कौन कहे, सुबह नौ बजे भी खुले आसमान के नीचे खड़ा रहना लोगों के लिए संभव नहीं हो पा रहा है। गर्मी के बीच शरीर से पसीना टपकने लग रहा है। धरती गर्म होने के साथ मकान भी पूरी तरह से तपने लग रहे हैं। इससे कूलर-पंखा का हवा भी गर्म हो जा रहा है। छतों पर सीमेंट से बनी टंकी के साथ ही प्लास्टिक के टंकी का पानी खौलने लग रहा है, जिसका नहाने में भी लोग इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। शुक्रवार को पारा 42 से पार रहा है। इससे हर कोई बेहाल रहा। मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं लोग आते-जाते दिखाई दे रहे थे, जिनकी कुछ मजबूरी थी। आवागमन करने वाले अधिकांश महिलाएं और युवतियां छतरी के साथ ही दुपट्टा से धूप से बचाव करते हुए नजर आई। धूप के बीच आवागमन करने वालों को जब ऐसा महसूस हो रहा था कि अब वह धूप का सामना नहीं कर पाएंगे तो पेड़ों की छाव के साथ की मकानों के बारजे और दुकानों के टीनशेडों के नीचे ठहर जा रहे थे। कुछ राहत मिलने के बाद ही आगे के लिए रवाना हो रहे थे। मौसम की मार से परेशान लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि बारिश का मौसम आने के बाद ही गर्मी से छुटकारा मिलेगा।