सैदपुर। खेलों में बेहतरीन माने जाने वाले और वर्षों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का दबदबा कायम करने वाली हाकी की दुर्दशा पर धुरंधरों ने हैरानी व्यक्त की है। क्षेत्र के अठगांवा में आयोजित स्व. हरिकेश सिंह, लोदी सिंह-द्वारिका सिंह अखिल भारतीय हाकी प्रतियोगिता में अपना जौहर दिखाने आए खिलाड़ियों ने कहा कि क्रिकेट की तरह अगर हाकी पर थोड़ा ध्यान दे दिया जाए तो हाकी फिर से देश को स्वर्ण पदक दिलाने लगेगी।
देवरिया से अठगांवा में हॉकी खेलने आए हाकी खिलाड़ी इस हालत पर हैरान हैं। अठगांवा जैसे ग्रामीण इलाके में हॉकी के लिए लोगों की दीवानगी और भीड़ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जुम्मन हाशमी ने कहा कि इस खेल में शासन की ओर से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलती है। इस वजह से यह खेल उपेक्षित होता जा रहा है। देश के लिए स्वर्ण पदक बटोरने वाली हाकी की उपेक्षा पर खिलाड़ी जितेंद्र यादव ने चिंता व्यक्त की है। कहा कि अन्य खेलों का कुछ भी हिस्सा अगर हाकी को मिल जाए तो हाकी की तस्वीर बदल जाएगी। खिलाड़ी राहुल ने कहा कि हाकी को खेल क्षेत्र में बेहतर स्थान न पाने के पीछे हाकी संघ की पुरानी सोच जिम्मेदार है। खेल के लिए आया धन अन्य मद में खर्च किया जाता है तो हाकी की तस्वीर कैसे बदलेगी। खिलाड़ी ऋषभ त्रिपाठी कहते हैं कि सरकार के साथ अन्य सामाजिक संस्थाएं अगर क्रिकेट की तरह हाकी को प्रोत्साहित करें तो हाकी की तस्वीर विश्व खेल मंच पर बहुत ही आकर्षक होगी। हाकी का खेल जोश और जज्बे का है, जो पूर्वांचल में खूब है लेकिन हाकी के लिए संसाधन और हाकी की तकनीक के अभाव में युवाओं के जोश और जज्बे दोनों ही अर्थहीन होते जा रहे हैं। हाकी की यह बदहाली युवाओं और हाकी दोनों के लिए दुखद है।