सुहवल(गाजीपुर)। क्षेत्र के रेवतीपुर गांव में 101 कुंडीय श्रीमद्भागवत ज्ञान महायज्ञ कथा में रविवार को सातवें एवं अंतिम दिन कथा वाचक आचार्य पंडित शिवप्रकाश चौबे ने दो नदियों के संगम को प्रयाग और तीन नदियों के संगम को प्रयागराज की संज्ञा देते हुए बेणेश्वर की महिमा का बखान किया। कहा कि भक्ति और कथा का प्रारंभ करुणा से होता है।
उन्होंने कहा कि जियो और जीने दो के सिद्धांत को जीवन में उतारने का महत्व सनातन धर्म में बताया गया है। सनातन धर्म की उदारता के बारे में बताते हुए कहा कि यहां सिर्फ भगवान ही नहीं बल्कि पशु, पक्षी वृक्ष और नदियों को भी पूजा की जाती है। जीवन मर्यादित होना चाहिए। ज्योतिष का महत्व बताते हुए कहा कि ज्योतिष को वेदों का चक्षु कहा गया है। ज्योतिष के बिना वेद देख नहीं सकते। जिस प्रकार जीवन में औषधि, रसायन, अमृत, आसव चार वस्तुओं का अलग-अलग महत्व होता है इसी प्रकार भागवत कथा सुनने से इन चारों की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा सबके लिए उपयोगी है। भागवत कथा श्रवण तभी सार्थक है जब हम दुखी मानव की सेवा के लिए आगे हैं। भक्ति मार्ग को ह्रदय में उतारने वाला व्यक्ति मृत्यु के भय से दूर हो जाता है। कथा, प्रवचन के बाद भंडारा का आयोजन किया गया। इसमें आसपास के कई गांवों के महिला, पुरुष एवं बड़ी संख्या में बच्चों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर आयोजक संतोष चौबे, बंगा पांडेय, राम तिवारी, महेंद्र यादव, जयशंकर राय, मनोज राय, बबलू, प्रेमसागर, बृजेश, छन्नू चौबे, विनोद खरवार, रामप्रसाद, सूर्यप्रकाश आदि उपस्थित थे।