महानगर अब जल्द ही एलईडी (लाइट एमिटिंग डायोड) लाइट्स से जगमगाएगा। निगम ने अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए प्राइवेट कंपनी का साथ लिया है। प्राइवेट कंपनी ने शहर में लगी सोडियम और ट्यूब लाइटों को बदलने से पहले सर्वे शुरू किया है।
पूरे शहर में यह प्राइवेट फर्म सर्वे कर आंकलन करेगी कि एलईडी लाइट लगाने पर कितना बजट खर्च होगा और इससे प्रतिमाह होने वाली बिजली बिल की बचत कितनी होगी। पीपीपी मॉडल पर सोडियम लाइटों को एलईडी लाइटों से बदलने की यह योजना शहर के वसुंधरा जोन से शुरू होगी।
दरअसल यूपी के शहरों में हर महीने तकरीबन 70 करोड़ रुपये से ऊपर बिजली का बिल भरा जा रहा है। गाजियाबाद नगर निगम भी स्ट्रीट लाइटों के लिए तकरीबन 1.5 करोड़ रुपये हर महीने खर्च करता है।
ऐसे में नगर निगम क्षेत्र में अब सोडियम लाइट्स की बजाय एलईडी लाइट लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। गाजियाबाद में यह काम प्राइवेट फर्म व्हाइट प्लाकार्ड प्राइवेट लि. को दिया गया है। यह कंपनी शहर में सर्वे कर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी। शासन से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली तो याजना पर काम शुरू किया जाएगा।
50 फीसदी घट जाएगा बिजली बिल
सोडियम स्ट्रीट लाइट बदलकर एलईडी लाइटें लगाई गई तो गाजियाबाद नगर निगम का बिजली बिल 50 फीसदी तक कम हो जाएगा। 150 वाट की सोडियम लाइट से ज्यादा रोशनी 72 वाट की एलईडी लाइट कर देगी।
इसी तरह 250 वाट की सोडियम की बजाए 125 वाट की एलईडी और 400 वाट की बड़ी सोडियम हटाकर 220 वाट की एलईडी लाइट लगाई जाएगी। यानी सोडियम लाइटों को हटाकर कम बिजली खपत वाली एलईडी लगाने से निगम का बिजली बिल 1.5 करोड़ प्रतिमाह से घटकर 75 लाख या इससे भी कम रह जाएगा।
बचत से होगा कंपनी का भुगतान
कंपनी को एलईडी लाइट लगाने के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। प्रति महीने बिजली से होने वाली बचत की 80 फीसदी रकम कंपनी को लाइट लगाने के लिए दी जाएगी। इसके बावजूद नगर निगम को 20 फीसदी की बचत हर महीने होगी। - डीके सिन्हा, प्रभारी नगर आयुक्त