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सावधान! प्लास्टिक की बोतलें बांट रहीं कैंसर

Wed, 12 Jun 2013 05:30 AM IST
Ghaziabad
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डिस्पोजेबल बोतलों का बार-बार इस्तेमाल बढ़ा रहा कैंसर का खतरा
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देश में खाली प्लास्टिक की बोतलों को बार-बार इस्तेमाल की है प्रवृत्ति
गाजियाबाद। ‘प्लीज क्रश द बॉटल आफ्टर यूज’ यानी इस्तेमाल के बाद बोतल को नष्ट कर दें। कोल्डड्रिंक्स, मिनरल वाटर आदि की बोतल में यह लाइन जरूर लिखी होती है। लेकिन इस पर ध्यान कोई नहीं देता। पचास फीसदी से भी अधिक लोग ऐसी बोतलों का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। लोगों को इस बात का अंदाजा भी नहीं है कि आसानी से उपलब्ध इन बोतलों का बार-बार इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसी बोतलों के एक हफ्ते से दस दिन तक लगातार इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इतना ही नहीं, घरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले बिना फूड ग्रेड सर्टिफिकेट के प्लास्टिक के बर्तन, ग्लास, कंटेनर भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। जगन्नाथ धर्मार्थ कैंसर अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर के इंटरनेशनल कोआर्डिनेटर पीके अग्रवाल ने बताया कि इन बोतलों में ‘टैरिफ एक्ट’ के तहत निशान बने होते हैं। अक्सर यह निशान बोतल की तली में या निचली ओर बने होते हैं। इन निशानों से पता चलता है कि बोतल को कैसे और कितना इस्तेमाल करना है।
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कैंसर चैरिटेबल सोसायटी के अध्यक्ष डा. आरके पोद्दार ने बताया कि प्लास्टिक में पैक तरल पदार्थ सबसे नुकसानदायक हैं। खानपान से जुड़े कैंसर के मरीजों की संख्या पिछले पांच साल में काफी बढ़ी है। जिन प्लास्टिक की बोतलों या बर्तनों पर त्रिकोण निशान के अंदर 1 और उसके नीचे पीईटी लिखा हो वह सबसे खराब किस्म की प्लास्टिक होती है। ऐसी बोतल या बर्तन को एक ही बार इस्तेमाल करना चाहिए।
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कैंसर स्पेशलिस्ट डा.संदीप अग्रवाल ने बताया कि ऐसी बोतलों से बेंजीन आक्साइड का रिसाव होता है, जोकि कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) है। इनके इस्तेमाल से यथासंभव बचना चाहिए।
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