क्षेत्र की बीहड़ पट्टी में मिट्टी का अवैध खनन बदस्तूर जारी है। जेसीबी मशीन से टीला खोदकर ट्रैक्टर-ट्रालियों से मिट्टी ढोई जा रही है।
मालूम रहे कि यमुना नदी किनारे कई किलोमीटर तक बीहड़ क्षेत्र है, जिसमें उगने वाली घास और खरपतवार मवेशियों के चारे का जरिया बनते हैं।
वहीं हरियाली से पर्यावरण संतुलित रहता है। खनन माफिया प्रशासन की अनुमति और रॉयल्टी अदा किये बगैर मिट्टी खोदकर बेच रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि मूसानगर, हलिया, सिमरिया, नगीना, देवराहट, चपरघटा, भरतौली, कलुवाताला गांव से जुड़े घाटों से बालू खनन किया जा रहा है।
समाज सेविका सुमन सचान का कहना है कि अवैध खनन से जहां पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और सरकारी राजस्व की क्षति हो रही है। वहीं पशुओं का निवाला भी छिन रहा है। व्यापारी राजन पाल का कहना है कि टीलों की खुदाई से सीमावर्ती गांवों के लिए बाढ़ की चपेट में आने के आसार भी बनेंगे। इस बाबत एसडीएम आरपी त्रिपाठी ने कहा है कि खनन पर रोक लगी है। जानकारी करके अवैध खनन को रोका जाएगा।