झींझक ब्लाक के जलिहापुर गांव में डायरिया और बुखार से दो बच्चियों की मौत हो गई है। चार दिन पहले भी खसरे से एक मासूम की मौत हो चुकी है। 20 से ज्यादा बच्चे डायरिया, मिजल्स (खसरा) और चिकनपॉक्स से पीड़ित हैं। बताया गया कि गंदगी और गंदे पानी से बीमारी फैली है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम कैंप कर रही है लेकिन उन्हें इलाज करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्रामीण अंधविश्वास के कारण इलाज ही नहीं करा रहे हैं। गुरुवार को सीएमओ, एसडीएम के गांव पहुंचने के बाद सफाई शुरू हुई और लोगों को जबरदस्ती दवाएं खिलाई गईं। गांव में ओआरएस पैकेट, पैरासीटामाल और एंटीबायोटिक दवाओं का वितरण किया गया है।
गांव वालों का कहना है कि छह अप्रैल से कुछ बच्चों को खांसी व छींक के साथ बुखार और शरीर पर छोटे-छोटे दाने पड़ने लगे। इस बीच कुछ बच्चों को उल्टी-दस्त शुरू हो गई। गुरुवार सुबह दलित बस्ती की रागिनी (2) पुत्री शिवराज और कोमल (2) पुत्री श्यामसुंदर की डायरिया से मौत हो गई।
दोनों बच्चियां कई दिनों से बीमार थीं लेकिन परिजन उनका इलाज नहीं करा रहे थे। श्यामसुंदर ने बताया कि उसकी दो बेटियां कामिनी (3), लक्ष्मी (4) भी बीमार हैं। शिवराज के बेटे सुखदेव (9), भूरा (2), रामविलास के बेटे राजा (7), गौरव (5), सौरभ (4) और बेटी खुशी (2) के साथ दर्शन (3), शिवप्रसाद (3), रमेश की बेटी कामिनी (7), बेटा विकास (11), विशाल (10), प्रेमनरायण की बेटी गुड़िया (4), सोमवती (3), नेहा समेत 20 से ज्यादा बच्चे बीमार हैं।
जलिहापुर निवासी जगत सिंह की बड़ी बेटी दीक्षा (4) बीते छह अप्रैल से खसरा की चपेट में थी। जगत सिंह उसका इलाज झाड़फूंक कर करा रहा था। 11 अप्रैल की उसकी मौत हो गई थी। जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सिद्धार्थ पाठक ने बताया कि दोनों बच्चों की मौत डायरिया से हुई है। कुछ बच्चों को चिकनपॉक्स भी है।