शुक्रवार को शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र के लिए दुर्गा मंदिरों और घरों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा अर्चन की तैयारियां पूरी की गई। भक्तगण आज मां दुर्गा के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करेंगे। गुरुवार की देररात तक मंदिरों में साफ सफाई का कार्य चलता रहा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार माता दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करने से सभी रोगों से मुक्ति मिलती है। माता की पूजा करने वाला भक्त रोग-क्लेश से दूर होकर निरोगी व स्वस्थ्य होता है। मंदिरों व घरों में मंत्रोच्चारण से घट स्थापनाकर पूजन किया जाएगा।
पूजन के विधिविधान के बारे में पंडित शिवनारायण तिवारी बताया कि भक्तगण मां शैलपुत्री के प्रथम रूप को प्रसन्न करने के लिए सुबह स्नान करने के बाद लालफूल, नारियल, सिंदूर, शृंगार सामग्री आदि चढ़ाएं। प्रसन्न होकर माता शैलपुत्री अपने भक्त को मनोवांछित फल देती हैं। मां शैलपुत्री का पूजन करने के दौरान मां के चरणों में घी का दीपक जलाना चाहिए।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माता का यह स्वरूप शैलीपुत्री कहलाता है। इधर, जिले में अकबरपुर स्थित कालिका देवी मंदिर, शुक्ल तालाब मंदिर, श्रीबालाजी धाम मंदिर, सांई मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सजावट की गई है।