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पत्नी को अधमरा कर युवक ने फांसी लगाई

Thu, 13 Jul 2017 01:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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घ्‍ाायल युवती। - फोटो : अमर उजाला
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अकबरपुर क्षेत्र के मैदू गांव में मंगलवार की रात नशेबाजी को लेकर हुए विवाद के बाद दीपक मिश्रा (26) ने पत्नी संध्या (24) को मरणासन्न कर फांसी लगा ली। युवक का शव छत के कुंडे के सहारे रस्सी से लटकता मिला। वहीं, पति की पिटाई से घायल संध्या हैलट अस्पताल में जिंदगी के लिए लड़ रही है।  पुलिस ने दीपक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
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कस्बे के मैदू गांव निवासी जगदीश नारायण मिश्रा के बेटे दीपक की शादी 2011 में इंद्ररुख गांव की संध्या से हुई थी। खेती किसानी करके दीपक परिवार चलाता था, उसके एक बेटा उत्सव (4) भी है। गत मंगलवार की रात एक बजे दीपक नशे में धुत होकर घर पहुंचा। संध्या के नशेबाजी का विरोध करने पर झगड़ा शुरू हो गया। इसके बाद संध्या बेटे को लेकर चारपाई पर लेट गई। इधर गुस्साए दीपक ने पास पड़ी ईंट उठाकर संध्या के सिर पर ताबड़तोड़ कई वार कर दिए, जिससे वह लहूलुहान हो गई। बहू की चीखने की आवाज सुनकर ससुर जगदीश दौड़े तो दीपक घर से भाग निकला।

कमरे में बहू को खून से लथपथ देखकर जगदीश उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां गंभीर हालत में उसे हैलट रेफर कर दिया। इधर, कुछ देर बाद घर पहुंचे दीपक ने पंखे के कुंडे से रस्सी के सहारे फांसी लगा ली। बुधवार की सुबह मां लक्ष्मी कमरे से बाहर निकली तो बेटे का शव लटकता देख चीख निकाल गई। आवाज सुनकर आसपड़ोस के लोग आ गए। जगदीश और पुलिस को सूचना दी गई।
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इंस्पेक्टर संजय सिंह और एसआई नंद किशोर ने मौके पर पहुंचकर छानबीन कर शव को पोस्मार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर का कहना है कि नशेबाजी के विवाद के बाद युवक के पत्नी को मरणासन्न कर फांसी लगाने की बात सामने आयी है। मौके से खून से सना ईंट भी बरामद किया गया है। महिला के होश में आने के बाद घटना की सच्चाई का पता चल सकेगा।

दीपक की मां लक्ष्मी ने बताया कि बेटे की नशेबाजी के कारण बहू नाती को लेकर 15 जून को मायके चली गई थी। इसके बाद कई बार वापस बुलाने की कोशिश की, लेकिन आने से इंकार कर दिया। दीपक ही 30 जून को उसे समझा-बुझाकर साथ लेकर आया था।   

गांव वालों की माने तो शादी के कुछ दिन बाद से ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया था। संध्या दीपक की नशेबाजी का विरोध करती थी। गलत संगतों के चलते वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आता था। अक्सर ही दोनों के बीच झगड़े होते थे। आस-पड़ोस वाले भी उनके झगड़ों के आदी हो चुके थे।


घटना से अंजान मासूम उत्सव मां संध्या को घर में न पाकर बिलखता रहा। उसे तो यह भी पता नहीं था कि उसकी मां के साथ क्या हुआ हैं। इतना ही नहीं पिता के शव के पास जाकर उन्हें उठाने की कोशिश कर मां के बारे में पूछा तो वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। आस-पड़ोस वालों ने उसे झूठा आश्वासन देकर ढांढस बंधाया।
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