राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर कर्मचारियों की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। बुधवार को हड़ताल का जोरदार असर रहा। दफ्तरों में कामकाज ठप रहा तो कुछ कर्मचारी काम करते भी नजर आए। अस्पतालों में मरीजों को परेशानी रही, मजबूरी में निजी अस्पताल की ओर रवाना हो गए। विकास भवन में पेंशन, छात्रवृत्ति आदि संबंधी जानकारी करने आए फरियादियों को बैरंग लौटना पड़ा।
यूपी लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के निर्देश पर सभी लैब टेक्नीशियन आंदोलन में शामिल हुए। मरीजों की जांचें नहीं होने से तीमारदार मायूस हुए। नलकूप खंड कार्यालय में भी सन्नाटे का माहौल रहा। डिप्लोमा इंजीनियर सड़क निर्माण संबंधी किसी भी साइट पर नहीं गए। जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुबह 8 से 11 बजे तक स्वास्थ्य सेवाएं ठप रही। फार्मेसिस्ट से लेकर किसी भी कर्मचारी ने कोई काम नहीं किया।
एआरटीओ दफ्तर में कर्मचारियों की हड़ताल का पूरा असर दिखा। कर्मचारी कमरों में ताले डालकर नारेबाजी करके भड़ास निकालते रहे। अमीनों ने कोई काम नहीं किया।
विकास भवन में भी हड़ताल ने असर दिखाया। इक्का-दुक्का कार्यालयों में कर्मचारी काम करते नजर आए जो कि संविदा पर कार्यरत हैं। कर्मचारी गेट के बाहर धरना देकर प्रदर्शन करते रहे। मंडल अध्यक्ष रजनीश शुक्ला ने बताया कि 11 व 12 अगस्त को भी जोरदार हड़ताल रहेगी। करीब 27 संगठनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया है। परिषद के अध्यक्ष एचएन शुक्ला, जिला मंत्री राजेंद्र सिंह, कर्मचारी नेता मनोज शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, राजीव श्रीवास्तव, रज्जन सोनकिया, सीएम पांडेय, संजय मिश्रा, रामनिवास, दिनेश तिवारी, रामकृष्ण श्रीवास्तव, प्रकाश सिंह, विजय सिंह, देवेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।