हादसे का शिकार हुई सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस में किसी यात्री की जान नहीं गई लेकिन इस हादसे ने रेलवे को तगड़ा झटका दिया है। रेलवे सूत्रों ने इस हादसे में 30 से 35 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया है। उनके अनुसार एक बोगी को बनाने में करीब दो करोड़ की लागत आती है।
भारतीय रेलवे जहां आर्थिक घाटे को लेकर चर्चा में रहती है। वहीं, देश में एक बाद एक हो रहे हादसे रेलवे को आर्थिक चोट पहुंचा रहे हैं। रूरा में सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस के हादसे में 14 डिब्बे पटरी से उतरे हैं। उत्तर मध्य रेलवे के पीआरओ के अनुसार, एक कोच की कीमत दो करोड़ रुपये होती है।
हादसे के बाद कोच को रिपेयर करनेे में जितना खर्चा आता है, उससे अच्छा नया कोच तैयार कर लिया जाता है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस की क्षतिग्रस्त बोगियां को पटरियों से हटाकर किनारे डाल दिया गया है। जल्द ही इन बोगियों की स्क्रैप के रेट में नीलामी कर उनको बेंच दिया जाएगा। प्रथम दृश्य इसके अलावा ओएचई के तार, स्लीपर, पटरी आदि के डैमेज होने से रेलवे को करोड़ों का नुकसान हुआ।
हादसे के बाद रूरा में रेलवे कर्मचारी दिन रात ट्रैक सुधारने में लगे रहे। इस दौरान पड़ रही भीषण सर्दी में जहां लोग कांप रहे थे। वहीं, रेलवे के कर्मचारी खंभों में चढ़कर तार बांध रहे थे। इस दौरान हादसा स्थल पर आग जलाकर कर्मचारी हाथ सेंकते नजर आए। रात भर के जगे कई कर्मचारी पटरियों के किनारे गिट्टियों में सोते दिखे।
उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना व डीआरएम एसके पंकज सहित रेलवे के तमाम अधिकारी रूरा में पूरे समय कैंप किए रहे। लाइनों को चालू करवाने के लिए मौके पर खड़े होकर जायजा लेते दिखे। रूरा नहर पुल हादसे के बाद काफी खराब हो गया है। पुल के दोनों छोर की दीवारें टूट गई हैं। इसकी मरम्मत के लिए कर्मचारी जुटे नजर आए।