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नहर पड़ी सूखी, फसलें पानी की भूखी

Fri, 03 Mar 2017 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नहर - फोटो : अमर उजाला
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मार्च माह की शुरुआत में ही गर्मी का असर दिखने लगा है। नहरों और रजबहों में पानी न होने से सूख रही फसलों को देखकर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। रबी फसल के सिंचाई का समय बीत रहा है, लेकिन नहर से पानी नहीं मिल सका। वहीं, नलकूप से किराए पर पानी लेकर सिंचाई करना किसानों के लिए महंगा साबित हो रहा है।
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पिछले एक सप्ताह से नहर में पानी न होने से फसलों की सिंचाई का संकट गहराता जा रहा है। पूर्व में छोड़े गए पानी से किसानों ने किसी तरह से फसल की दूसरी सिंचाई कर ली थी। फसलों में दोबारा सिंचाई की जरूरत होने पर नहरें सूखी पड़ी हैं। रूरा क्षेत्र के नहर किनारे बसे अंबरपुर, बैजूपुरवा, गैजूमऊ, भारत सिंह का पुरवा, अमर सिंह का पुरवा, सिठमरा, धनीरामपुर, खुमानपुरवा, नवाबपुरवा, तिंगाई,   गैजूमऊ आदि गांवों में सिंचाई का मुख्य साधन रामगंगा नहर है। एक सप्ताह से लगातार नहर में पानी न होने से किसानों को गेहूं की अंतिम सिंचाई करने में खासी दिक्कतों हो रही है।


इस समस्या के चलते किसानों के समक्ष अंतिम विकल्प नलकूप से किराए पर पानी लेना है। यहां के किसान रामू पांडेय, रामशंकर यादव, पप्पू, बालकिशन, अमित यादव, विनोद, सुभाष यादव आदि ने बताया कि अचानक तापमान में बढ़ोत्तरी के कारण जमीन बहुत जल्दी ही सूख रही है।  यदि  समय रहते सिंचाई न हुई तो गेहूं की फसल कमजोर हो जाएगी। नलकूप से किराए में पानी लेने पर 150 रुपये प्रति घंटे का हिसाब देना पड़ता है। खेती करना काफी महंगा पड़ रहा है। नहर विभाग के अधिकारियों को भी समस्या बताई है।
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