सीएमओ कार्यालय पर धरने को संबोधित करते संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी।
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उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर संविदा कर्मचारी गुरुवार को भी हड़ताल पर रहे। इस कारण जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। संक्रामक बीमारी फैलने से परेशान मरीजों पर हड़ताल कहर बनकर टूटी। मजबूरी में सीएचसी व पीएचसी पहुंचे लोग निजी डाक्टरों की शरण में गए।
संघ के जिलाध्यक्ष जीपी द्विवेदी के नेतृत्व में जिले के संविदा कर्मचारी सीएमओ दफ्तर में एकत्रित हुए और नारेबाजी के बीच विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि यदि प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने उनकी मांगें न मानीं तो वे लोग उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। पूरे जिले के संविदा कर्मचारी अपना हक पाने के लिए एकजुट हैं।
संविदा कर्मियों की हड़ताल के कारण जिला अस्पताल में ब्लड बैंक का कार्य बाधित हुआ। वहीं पैथालॉजी में खून की स्लाइडों की जांच रिपोर्ट तैयार करने में दिक्कत सामने आईं। स्टाफ नर्सों के न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
रसूलाबाद, झींझक, रूरा, डेरापुर समेत अन्य इलाकों में सीएचसी व पीएचसी में लैब टेक्नीशियन समेत अन्य स्टाफ के काम पर न होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पंगु हो गईं।
संविदा कर्मचारी संघ के संयोजक रत्नेश वाजपेयी, उपाध्यक्ष डा. आफताब आलम, डा. आशीष, राजेंद्र यादव अमिताभ, आशुतोष मिश्रा, रजनी, निवेदिता, अंजू शर्मा ने बताया कि हड़ताल से उत्पन्न हालात के लिए सरकार जिम्मेदार है। कर्मचारी मजबूरी में कार्य बहिष्कार कर रहे हैं, क्योंकि सरकार उन्हें उनका हक नहीं दे रही है।