बिल्हौर में गरीब, निर्धन और जरूरतमंदों को भूदान आंदोलन के तहत दी गई जमीन की भौतिक स्थित परखने के लिए शासन से फरमान जारी हुआ है। तहसील क्षेत्र में ऐसी जमीनों के उपभोग की स्थित और बिक्री आदि का पता लगाकर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
राजस्व अधिकारियों की माने तो भूदान का रिकार्ड पुराना होने से खसरा, खतौनी और नक्शा के आधार पर पांच राजस्व सर्किल में भूमि का सर्वे किया जाएगा।
भूदान की जमीनों के बारे में बुधवार को तहसीलदार व्यास नारायण उमराव ने बताया कि भूदान आंदोलन के तहत क्षेत्र में कई किसानों को भूमि का पट्टा किया था, जिसका उद्देश्य भूमि की उर्वरता बढ़ाना और जरूरतमंदों की जरूरत को पूर्ण करना था।
बीते कुछ वर्षों में भूदान की भूमि का गलत इस्तेमाल की जानकारी हुई है। क्षेत्र के सभी राजस्व सर्किलों में भूदान की जमीन का सर्वे कराया जा रहा है। बताया कि भूदान की सभी आवंटित भूमि पूरी तरह सरकारी हैं।
तहसील में कसिगवां, कासामऊ, नानामऊ, बैड़ी अलीपुर, बैसठी, चक संभलपुर, दहेलिया, मुश्ता, सैलहा, मोहद्दीनपुर, सरदारपुर, रौतापुर कला, सुघर देवा, लक्ष्मणपुर मिश्रान, सुनौढा आदि गांवों में भूदान के तहत जमीनों के पट्टे किए गए हैं।
इन क्षेत्रों में कितनी भूमि है, आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं। जमीन का पता लगाने को नायब तहसील को काम सौंपा गया है। जो सभी राजस्व निरीक्षकों से भूदान का जमीन का ब्योरा तैयार कराएंगे।