कानपुर-फर्रुखाबाद रेल रूट की क्रासिंग संख्या-42 सी को बंद करने का मामले तूल पकड़ लिया है। शनिवार को ग्रामीण क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं। क्रासिंग को किसी भी कीमत में बंद न होने की बात कही है। विदित हो कि रेल रूट की क्रासिंग संख्या 41 व 42 के लिए रेल मंत्रालय ने डीएम से गांवों का सर्वे कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए थे। जिलाधिकारी ने 42 नंबर क्रासिंग को बंद करने की रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी है।
शनिवार को आधा दर्जन गांवों के सैकड़ों ग्रामीण जीटी रोड किनारे क्रमिक अनशन पर बैठ गए। मातृ भूमि संघर्ष समिति निवादा थाती के बैनर तले ग्रामीणों ने क्रासिंग बंद न होने देने का ऐलान किया है।
संगठन के अध्यक्ष शिवशंकर कुशवाहा, राम नारायण, मेवालाल, सूबेदार, जगदीश आदि ने आरोप लगाते कहा कि क्षेत्र के मोहाई बगिया, कपूरपुर, थाती निवादा, दिनकरपुर, मक्कापुरवा समेत दर्जनों गांवों के हजारों ग्रामीणों के साथ सर्वे में पक्षपात कर छल किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि क्रासिंग के बंद होने से कई किमी का चक्कर लगाना पड़ेगा और बेशकीमती जमीन की कीमत कम हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो क्षेत्र के एक कोल्ड स्टोर संचालक और निजी स्कूल संचालक अपने-अपने हित के लिए ग्रामीणों को आगे कर मामले को तूल दिए हुए हैं।
उधर, उपजिलाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि आलाधिकारियों के निर्देश के बाद बारीकी से 41 व 42 नंबर क्रासिंग पर रेल मंत्रालय के नियमों अनुसार सर्वे किया गया। इसके बाद 42 नंबर क्रासिंग को समाप्त तक 41 नंबर से जोड़ा जा रहा है।