उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर हड़ताल का दूसरे दिन भी व्यापक असर रहा। सरकारी कार्यालयों में तालाबंदी करने के बाद विकास भवन के मुख्य गेट के बाहर धरना देकर कर्मचारियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की। वहीं तहसील व विकास भवन पहुंचने वाले लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। वहीं अस्पतालों में सुबह 8 से 11 बजे तक हड़ताल का असर रहा। हर विभाग में समस्याओं को लेकर आए लोग परेशान घूमते नजर आए।
संयुक्त परिषद के मंडल अध्यक्ष रजनीश शुक्ला ने दावा किया कि हड़ताल पूरी तरह से कामयाब रही है। गुरुवार को रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद, उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ, ग्राम्य विकास अधिकारी संघ, अमीन संघ, आईसीडीएस सुपरवाइजर्स एसोसिएशन, उप्र लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा एसोसिएशन, समाज कल्याण मिनिस्ट्रीयल एसोसिएशन, सिंचाई संघ, पशुधन प्रसार अधिकारी संघ समेत दो दर्जन से अधिक संगठनों के कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा।
विकास भवन के मुख्य गेट पर सभी कर्मचारी इकट्ठा हुए। इस दौरान हक व हितों के लिए आवाज बुलंद करने की बात कही। वहीं कलेक्ट्रेट पूरी तरह से खुला रहा। डीआईओएस कार्यालय में कुछ कर्मचारी हड़ताल पर तो कुछ काम करते नजर आए। विकास भवन के अंदर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा रहा। दफ्तरों में कर्मचारियों के न बैठने के कारण अफसर भी नजर नहीं आए।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी नेता परिषद के अध्यक्ष एचएन शुक्ला, जिला मंत्री राजेंद्र सिंह, कर्मचारी नेता मनोज शर्मा, धर्मेंद्र, राजीव, रज्जन सोनकिया, सीएम पांडेय, संजय मिश्रा, राम निवास आदि मौजूद रहे।
वहीं कर्मचारियों ने शुक्रवार को भी हड़ताल पर रहने की बात कही। हड़ताल के चलते ग्रामीण क्षेत्रों से जो लोग पेंशन, शुल्क प्रतिपूर्ति संबंधी समस्याएं लेकर आए उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। एआरटीओ कार्यालय में डीएल आदि बनवाने के लिए आने वाले लोग खाली हाथ वापस लौटे।