उत्तरीपुरा कस्बे में नवीन पीएचसी, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल और पशुओं के लिए राजकीय पशु चिकित्सालय है। लेकिन तीनों के अस्पतालों में डाक्टरों की लापरवाही चरम पर है। अस्पताल में डाक्टर के नहीं मिलने पर मरीज लौट जाते हैं, तो वहीं पशुपालक निराश होकर निजी झोलाछाप डाक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हैं।
गुरुवार की सुबह 10:30 बजे भड़िया रोड स्थित नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर कई मरीज अस्पताल में बैठे मिले। डाक्टर और फार्मासिस्ट मौके पर नहीं मिला। वार्ड ब्वाय नंद किशोर ने बताया कि फार्मासिस्ट अशोक श्रीवास्तव नहीं आए हैं, यहां पर डाक्टर की नियुक्ति नहीं होने की बात कही।
सीएचसी बिल्हौर के कुछ डाक्टरों को रोस्टर के हिसाब से भेजा जाता है। फार्मासिस्ट के इंतजार में बुजुर्ग और महिलाएं ने बताया कि कोई देखने-सुनने वाला नहीं है। वहीं सुबह 10:50 बजे कस्बा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय पहुंचने पर फार्मासिस्ट त्रिभुवन नारायण पांडे अकेले ड्यूटी पर मिले।
डा. बृजेश सिंह कटियार और चतुर्थ श्रेणी कर्मी रानी देवी नदारद मिलीं। फार्मासिस्ट ने बताया कि चार मरीज दवा लेने के लिए अस्पताल आए हैं। राजकीय पशु चिकित्सालय में 11 बजे पहुंचने पर फार्मास्टि रामकरन ने बतायाकि डा. सुशील कटियार डुडवा गए हैं। चहारदीवारी न होने से अराजक तत्वों का आना-जाना रहता है। ग्राम प्रधान से कई बार साफ-सफाई के लिए कहा गया, लेकिन कूड़े के ढेर अस्पताल के सामने से नहीं हटवाए गए।