बिल्हौर क्षेत्र स्थित संयुक्त स्वास्थ्य केंद्र के बाहर कूड़े में पड़े सैकड़ों की संख्या में जीवन रक्षक इंजेक्शन और दवाओं को देखकर हड़कंप मच गया।
दो बच्चे के अस्पताल के समीप इंजेक्शन लेकर खेलने की जानकारी मिलते ही तहसीलदार ने सीएचसी में तैनात डाक्टरों से पूछताछ की।
हुआ यूं कि बिल्हौर सीएचसी में बुधवार की शाम चार बजे दो बच्चे अस्पताल की बाउंड्रीवाल के समीप इंजेक्शन से खेल रहे थे। इसकी सूचना जैसे ही तहसीलदार व्यास नारायण उमराव को लगी तो वह जांच को पहुंच गए। उन्होंने देखा कि सड़क किनारे सैकड़ों की संख्या में आइरन डेस्ट्रान और एट्रापिन नामक इंजेक्शन पड़े मिले।
अधिकारियों को देखकर बच्चे कई डिब्बे इंजेक्शन और दवाओं से भरे कई डिब्बे लेकर भाग गए। यह नजारा देखकर तहसीलदार ने तत्काल सीएचसी में आकस्मिक ड्यूटी पर तैनात डाक्टर और फार्मेसिस्ट को तलब किया। डाक्टर प्रशांत कुमार और फार्मेसिस्ट ने बताया कि दोनों ही इंजेक्शन सरकारी हैं और अभी इक्सपायर नहीं हुए हैं।
दोनों इंजेक्शन कूड़े में कैसे पहुंचे इसकी जानकारी नहीं दे सके। तहसीलदार ने दवाओं को सील कर सीएचसी के औषधि भंडार पहुंचे, लेकिन ताला लगा होने से तैनात चीफ फार्मेसिस्ट को मौके पर आकर स्टाक रजिस्टर चेक करने के निर्देश दिए गए।
जांच में डाक्टरों ने बताया कि आइरन डेस्ट्रान इंजेक्शन गर्भवती महिलाओं को लगाया जाता है। एट्ररोपिन इंजेक्शन हृदयगति को नियंत्रित करने का काम करता है। डॉ प्रशांत ने चिकित्सकीय स्टाफ की गलती स्वीकारी। उधर, तहसीलदार ने बताया कि कूड़े में फेंके गए इंजेक्शन और अन्य दवाओं का ब्योरा तलब कर जिला प्रशासन और शासन को भेजा जाएगा।