मंसुरा गांव के पास शनिवार को घाटमपुर रजबाहे की पटरी कटने से पांच गांव जलमग्न हो गए। वहीं 250 बीघा धान सहित अन्य फसल पानी में डूब गई। इससे खेतों में पकी धान की फसल बर्बाद होने की संभावना है। इधर जलमग्न गांवों में घरों के सामने जलभराव होने से निकलना दूभर है। वहीं नहर विभाग से जानकारी होने के बाद भी कोई पटरी बांधने नहीं पहुंचा।
शनिवार को मंसुरा गांव के समीप घाटमपुर रजबाहे की पटरी कटने से रहीमपुर, उमरन, संतोष का पुरवा, रामदीन का पुरवा, बिलई गांव जलमग्न हो गए। पानी बहाव तेज होने से चंद घंटों में पानी पूरे गांव में भर गया। घरों के सामने पानी भरने से लोगों को निकलने में परेशानी हुई।
वहीं गांवों के आसपास खड़ी धान सहित 250 बीघा फसलें जलमग्न हो गई। खेतों में पकी खड़ी धान फसल बर्बाद होते देख किसानों में हड़कंप मच गया। किसान आननफानन फसल बचाने के लिए बेताब दिखे, लेकिन पानी का तेज बहाव फसलों को अपनी चपेट में लेते गया।
किसान किशन लाल ने बताया कि धान की फसल पकी खड़ी थी, लेकिन जलभराव से बर्बाद होने की संभावना है। वहीं महिला किसान संतोष रानी ने बताया कि उन्होंने पांच बीघा पकी धान की फसल कटी पड़ी थी, लेकिन खेत में पानी भरने से बर्बाद हो जाएगी।
इसी प्रकार मंजू देवी ने बताया कि तीन बीघा पकी धान फसल के गट्ठर बंधे पड़े थे, जो जलभराव में डूब गए हैं। देर शाम तक नहर विभाग को कोई कर्मी पटरी बांधने नहीं पहुंचा।
नहर पटरी कटने की जानकारी मिली है। ग्रामीण खुद ही पटरी काट देते हैं। जब ग्रामीण उनसे पटरी बांधने के लिए कहेंगे। वह तभी पटरी बांधेंगे।- दिनेशचंद्र (जेई नहर विभाग)
नहर पटरी कटने से पहले भी बर्बाद हो चुकी फसल- बीते 19 सितंबर को भी करबक गांव के मजरा गदनापुर व मालवर गांव के समीप घाटमपुर रजबाहे की पटरी कटने से 300 बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। पानी के तेज बहाव से बालू खेतों तक पहुंचने से कई बीघा फसलें बर्बाद हुई थी।
इस पर ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त किया था। कई दिन बीतने के बाद नहर विभाग के कर्मियों ने नहर पटरी को बोरी, ईंट, मिट्टी आदि डालकर बांधा था।