घाटमपुर (कानपुर)। बेहुंटा गांव में बकरे को पीटने से मना करने पर दो पक्षों के बीच मारपीट हो गई। इसमें एक युवक की मौत और पांच लोग घायल हो गए। पुलिस ने आरोपी पक्ष के लोगों को हिरासत में लिया है। मृतक गांव में परचून की दुकान करता था।
गांव निवासी कैलाश सचान ने बताया कि उनका बेटा रमेश सचान उर्फ कुक्कू (35) घर के बाहर परचून की दुकान रखे था। गुरुवार दोपहर गांव का ही राजकुमार खंगार उसके दरवाजे के सामने घूम रहे बकरे को घेरकर सरिया से पीटने लगा। यह देख दुकान पर बैठे कुक्कू सचान ने मना किया। इसी बात पर उनके बीच विवाद हो गया। गाली-गलौज और मारपीट होने लगी। राजकुमार के पक्ष में उसके लड़के केशव, अभिषेक, भाई रमेश खंगार और भतीजा कल्लू लाठी-डंडे और बरछी लेकर आ गए। सभी ने कुक्कू को घेरकर पीटना शुरू कर दिया। यह देख कुक्कू सचान के परिजन बचाने दौड़े तो उन पर भी हमला कर दिया। लोहे की सरिया और बरछी लगने से कुक्कू सचान (35) की मौके पर ही मौत हो गई।
मारपीट में कुक्कू के भाई हेमंत (50), अवधेश (40), भतीजा छोटू (17) और छोटू की मां पूर्णिमा (38) घायल हो गए। दूसरे पक्ष के राजकुमार को भी चोटें आई हैं। कुक्कू सचान की मौत की जानकारी पर आरोपी पक्ष के लोग मौके से भाग निकले। इन्हें गांव के लोगों ने एकजुट होकर घेर लिया। कोतवाल सच्चिदानंद त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और आरोपियों को हिरासत में ले लिया। कोतवाल ने बताया कि तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।
देवी के नाम पर खुला छोड़ते हैं बकरा
गांवों में लोग किसी मान्यता के पूरी होने पर देवी के नाम पर बकरा छोड़ते हैं। उसकी बलि नहीं दी जाती है। विधि-विधान के साथ पूजन करने के बाद बकरे को देवी के नाम भेंट के रूप में गांव के लिए समर्पित कर दिया जाता है। वह खुला घूमता है। मोतीपुर गांव निवासी बुजुर्ग रामचंद्र सचान ने बताया कि देवी के नाम पर गांवों में सांड़, बकरा और भैसा छोड़ने की परंपरा काफी पुरानी है।