परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए शासन ने अब एक और नया कदम उठाया है। प्राथमिक विद्यालयों को मॉडल स्कूल बनाने की कवायद शुरू की गई है। जिसमें हर ब्लॉक में पांच स्कूल चिह्नित किए जा रहे हैं। सब कुछ ठीक रहा तो अगले सत्र यानी अप्रैल से इन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं और करोड़ों रुपये भी खर्च हो रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने हर ब्लॉक में पांच प्राइमरी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप मे विकसित करने का लक्ष्य रखा है। स्कूलों के चयन के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कई ब्लॉकों में चयन का काम पूरा भी हो गया है। हर ब्लॉक से पांच स्कूल चयनित होने पर जिले में 50 प्राथमिक विद्यालय मॉडल स्कूल बन जाएंगे। यहां शिक्षण कार्य करने के लिए परिषदीय शिक्षकों का साक्षात्कार कर अंग्रेजी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को तैनात किया जाएगा। वह बच्चों को पूरी तरह से अंग्रेजी में पढ़ाएंगे।
मॉडल स्कूल बनाए जाने के यह हैं मानक
बेसिक शिक्षा विभाग के सिर्फ प्राथमिक स्कूलों को ही अभी मॉडल स्कूल बनाया जा रहा है। आगे इसमें जूनियर विद्यालय भी शामिल हो सकते हैं। मॉडल स्कूल बनाए जाने के लिए सबसे पहले तो बीआरसी परिसर में स्थिति स्कूल को वरीयता देना है। स्कूल की छात्र संख्या कम से कम सौ होनी चाहिए। वहीं उस प्राथमिक विद्यालय को वरीयता दी जाएगी जिसके परिसर में उच्च प्राथमिक विद्यालय भी संचालित हो। विद्यालय में बाउंड्रीवाल, पेयजल, शौचालय आदि की व्यवस्था होनी#चाहिए।
ऐसे तैनात होंगे शिक्षक
मॉडल स्कूल का चयन होने के बाद वहां शिक्षकों को तैनात करने के लिए परिषदीय शिक्षकों का जिला स्तरीय समिति साक्षात्कार लेती है इसके बाद अंग्रेजी में योग्य शिक्षकों का चयन कर उन्हें मॉडल स्कूल में तैनात किया जाता है।
अभी जिले में हैं सिर्फ दो मॉडल स्कूल
जिले में सबसे पहले अकबरपुर ब्लॉक के बीआरसी परिसर स्थित प्राथमिक स्कूल को मॉडल स्कूल बनाया गया था। इसके बाद सरवनखेड़ा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय रनियां को मॉडल स्कूल के घोषित किया गया। दोनो स्कूलों में बेहतर परिणाम आए हैं। मॉडल स्कूल बनाए जाने के बाद आए अच्छे परिणाम पर बेसिक शिक्षा विभाग ने अब इसे विस्तृत रूप से शुरू करने की योजना तैयार की है।