कार्यक्रम के दौरान मौजूद मुख्य अतिथि व अन्य
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स्वाबलंबी बनने के लिए युवाओं को स्वरोजगार पर ध्यान देना होगा, रोजगार बढ़ेगा तभी देश उन्नति के रास्ते पर चलते हुए भारत विश्वगुरु बन पाएगा। कृषि उत्पादन में अत्यधिक उर्वरक और दवाओं का उपयोग जीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है। तेजी से पनप रहीं बीमारियों पर नियंत्रण के लिए अब जैविक खेती को बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है। यह बातें शुक्रवार को गौरी लक्खा गांव में आयोजित गांव आधारित समग्र विकास सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के पूर्व सचिव डा. कमल टावरी ने ग्रामीणों से कहीं।
क्षेत्र के गौरी लक्खा गांव स्थित गोशाला में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सीनियर आईएएस डा. कमल टावरी ने गांव में स्थापित विकलांग गौशाला की सराहना करते हुए कहा कि यह विडंबना ही है, कि ज्यादातर लोग दूध बंद करते ही गाय को उसके हाल पर छोड़ देते हैं।
कहा कि गाय प्रदत्त गौमूत्र व गोबर हमारे जीवन के लिए उपहार स्वरूप हैं। जीवन में पंच गव्य का प्रयोग कर विभिन्न तरह की बीमारियां से बचा जा सकता हैं। कार्यक्रम में मौजूद ग्राम प्रधानों से जैविक खेती करने की बात कहीं। वहीं, कार्यक्रम संयोजक पंडित रामजी त्रिपाठी ने गोरक्षा का संकल्प दिलाया। कार्यक्रम में मौजूद डीपीआरओ निरीश साहू ने भी जैविक
खेतों को मानव जीवन को लाभप्रद बताया।
इस दौरान गाय गंगा और गौरी के लिए किए जा रहे सराहनीय प्रयास के लिए आए अतिथियों ने कार्यक्रम आयोजक पंडित रामजी त्रिपाठी को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में एडीओ पंचायत सुरेश निगम, प्रमोद मिश्रा, रामसेवक यादव, पीयूष मिश्रा, उमेश मिश्रा, अनिल शुक्ला मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुबोध दीक्षित ने किया।