मूसानगर क्षेत्र में बाढ़ का पानी गुरुवार को एक फुट कम हुआ है, मगर लोगों की दिक्कतें कम नहीं हुईं। डूबीं खरीफ की फसलें सड़ रही हैं। घर पानी से घिरे हैं और नावों के सहारे ही आवागमन हो रहा है।
पशुओं के चारे की समस्या गहराई है। समय रहते सरकारी सहायता न मिलने पर किसान परिवारों के सामने रोटी का संकट भी गहराने के आसार बने हैं।
मालूम हो कि यमुना नदी के पानी का दबाव बढ़ने से सेंगुर नदी उफनाई है। जिससे क्षेत्र के आढ़न, पथार, पड़ाव, कुंभापुर, कृपालपुर, रसूलपुर-भुरंडा, भरतौली, सिहारी, लवरसी, देवराहट, अहरौलीघाट, मउदन, बम्हरौलीघाट, सिमरिया, कट्टापुर्वा, मुसरिया, क्योंटराबांगर, नगीनाबांगर, हलिया, नयापुर्वा गांव एक पखवारे से टापू बने हैं।
क्षेत्र के राधेश्याम, मुरली, श्यामबिहारी, विमलेश कुमार कहा है कि जलभराव से बीमारियां फैल रही हैं। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डा. योगेंद्र सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित गांवों में टीम भेजकर मरीजों का इलाज कराया जा रहा है।
गुरुवार को मुसरिया में 15, नयापुर्वा में पांच और हलिया गांव में आठ मरीजों के खून की जांच के लिए नमूने भी लिए गए। क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट भी बांटे जा रहे हैं।