सूखे की कगार पर पहुंचे कानपुर देहात जिले की शासन ने सुध लेनी अब शुरू कर दी है। भोगनीपुर खंड के वर्षों पहले अस्तित्व खो चुके बदनपुर रजबहे को पुनर्जीवित करने और उसके विस्तारीकरण के लिए पांच करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दे दी है। इसी माह से इसमें कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
रजबहे में पानी आने के 20 से अधिक गांवों की फसलों में सिंचाई आसान हो जाएगी। साथ ही पशुओं के भी पानी मिलने लगेगा। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने कानपुर देहात में वर्षों से खाली पड़े खारजा रजबहे को पुनर्जीवित करने के लिए पांच करोड़ रुपये शेष राशि आवंटित कर दी है।
इस माह के भीतर इस रजबहे में कार्य शुरू कर दिया जाएगा। रजबहे में पानी आने से क्षेत्र के कई गांवों को सिचाई और पशुओं की पेयजल समस्या आदि से राहत मिल सकेगी। भोगनीपुर शाखा अधिशाषी अभियंता जेपी अवस्थी ने बताया कि भोगनीपुर से शुरू होने वाले इस रजबहे में पानी लाने के लिए विभाग ने 995.26 लाख की कार्ययोजना बनाई थी, जिसे मंजूरी के लिए शासन को भेजा था।
शासन बीते वित्तीय वर्ष में इसकी पहली किस्त के रूप 495.26 लाख जारी किए थे। अब शासन ने शेष पांच करोड़ की राशि अवमुक्त कर दी है। अब परियोजना पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
नरोरा बांध से एक वाहिका (चैनल) नहर प्रणाली को नानु से 48 किमी नीचे से काटती है और सेंगुर नदी, सेरसा नदी और मैनपुरी जिले के शिकोहाबाद को पार कर आगे बढ़ती है और गंगा नहर की भोगनीपुर शाखा कहलाती है। इसे 1880 में खोला गया था। यह शाखा, मैनपुरी जिले के जेरा गांव से शुरु होकर 166 किमी की दूरी के बाद कानपुर पहुंचती है। 64 किलोमीटर की दूरी पर बलराय सहायक शाखा जो एक 6.4 किमी लंबी वाहिका है, अतिरिक्त पानी को यमुना नदी में छोड़ती है।
इस शाखा में सहायक वाहिकाओं की कुल दूरी 386 किलोमीटर है। भोगनीपुर शाखा, कानपुर और इटावा शाखाओं के साथ निचली गंगा नहर के नाम से जानी जाती है। निचली गंगा नहर में कम पानी होने की स्थिति में प्रयोग किया जाता है।मीरपुर निवासी किसान प्रेम सिंह ने कहा कि भोगनीपुर शाखा का बंद पड़ा यह रजबहा अपनी पहचान खो चुका है। कई स्थानों पर यह पूरी तरह बंद है। पानी लाने के लिए इसकी सफाई के साथ साथ खुदाई भी जरूरी है। कहा कि रजबहा चालू होने से किसानों को पानी के लिए निजी ट्यूबवेल का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। कहा कि नहरों और रजबहों में अगर पानी आने लगे तो फसलें उगाना आसान हो जाएगा।
वहीं, भोगनीपुर निवासी किसान धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि वर्षों बीत गए भोगनीपुर शाखा के इस रजबहे में पानी आए। सरकार ने इसे पुनर्जीवित कर दे तो इस इलाके के खेत लहलहा उठेंगे। कहा कि सरकार किसानों को अगर सिंचाई सुविधा ठीक कर दे तो किसानों के लिए इससे बड़ा तोहफा कोई और नहीं हो सकता। कहने लगे कि गर्मी के दिनों में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। पानी आने लगे तो किसान खेती के साथ पशुपालन भी करने लगेंगे।