मौसम के मार से आम की बौर को भी पैदा हुआ खतरा।
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आसमान में मंडरा रहे बादलों ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दीं हैं। इधर, सामान्य से अधिक तापमान होने से रबी की मुख्य फसल गेहूं के दाने पतले और कमजोर पड़ने के साथ ही आम की बौर रोगग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है। जबकि, दलहनी फसलों में फलीछेदक कीट का हमला शुरू हो गया है।
ज्ञात हो कि मार्च के महीने में मौसम का रुख लगातार बेगाना हो रहा है। महीने की शुरुआत में जहां दो-तीन बार छिटपुट बारिश हुई और कुछ स्थानों में ओले गिरे। वहीं तेज हवाएं चलने से गेहूं के पौधे गिर जाने से 25 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान हुआ है।
इधर, बीते तीन दिनों से तापमान सामान्य से अधिक होने के चलते गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। जबकि, शनिवार की सुबह से फिर आसमान में बादल बादलों के मंडराने और धुंध छाने से किसान बारिश होने और ओले गिरने की आशंका जता रहे हैं। किसानों ने बताया कि एकाएक तापमान बढ़ने से खेतों में खड़ी रबी की फसलें एक साथ समय से पहले ही पक गई हैं।
जबकि, इस दौरान मामूली बरसात होने अथवा ओले गिरने से उनमें नुकसान होना तय है। दूसरी तरफ आम के पेड़ों पर आई बौर में टिकोरे (अमिया) लगनी शुरू हो गई है। गर्मी का प्रकोप बढ़ने से उनका झड़ना शुरू हो गया है।
जबकि, बौर में भुनगा और अन्य कीटों का हमला भी शुरू हो गया है। आम उत्पादक किसानों ने बताया कि पेड़ों में अमिया लगने के समय कीटनाशकों का छिड़काव भी करना लाभदायक नहीं है। बताया कि इससे फलों की बढ़त रुक जाएगी। वहीं, दलहनी फसलों चना, मसूर मटर और अरहर की फसलों पर फलीछेदक कीट का हमला हो रहा है।