प्राथमिक विद्यालय डीघ के कक्ष में भरा बिजली का सामान।
पुखरायां। छुट्टी के बाद शिक्षा सत्र की शुरूआत अव्यवस्थाओं के बीच शुरू होगी। परिसरों और कक्षाओं में साफ-सफाई का अभाव है। बच्चों को स्वयं सफाई करनी होगी या फिर गंदगी में ही बैठना होगा। शिक्षकों ने शिक्षाधिकरी के आदेश का पालन नहीं किया।
परिषदीय विद्यालय सोमवार से खुलेेंगे, जहां एक महीने तक कोई सुध नहीं लेने आया। विद्यालयों में सफाई का अभाव रहा। जहां की तहां अव्यवस्थाएं हो गई। विद्यालय परिसर और भवन की ओर सफाई कर्मियों ने भी अपना रुख नहीं किया। ब्लाक मलासा के प्राथमिक विद्यालय डीघ में रविवार तक एक कमरे में लकड़ियां भरी हुई हैं।
वहीं, दूसरे कमरे में दूसरे कमरे में भारत सरकार की ओर से सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शनों में मीटर लगाने वाले कर्मचारी रुके थे, जिसमें 15 गांवों के लिए पाइप, मीटर, तार का भंडारण किया गया है। ग्रामीण बताते हैं की स्कूल मैदान और कमरे से निकलते हुए जहरीले कीड़े भी देखे गए हैं। ऐसे में छुट्टी के बाद प्रारंभ होने वाले शिक्षा सत्र के पहले दिन बच्चों को सफाई करनी होगी या फिर कहीं और बैठ कर शिक्षा ग्रहण करनी होगी। पहला दिन गंदगी मिट्टी और धूल के बीच बैठकर ही काटना होगा।
इस बाबत प्रधानाध्यपक ममता ने बताया कि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने कहा था कि सरकारी काम है। वह 28 जून को कमरे को खाली करके सफाई करा देंगे। वहीं दूसरे कमरे में जमा लकड़ियां हटवा कर सफाई करा दी जाएंगी। वहीं इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी अरूणोदय सचान ने बताया कि सभी प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों को निर्देशित किया गया था कि विद्यालय खुलने के दो दिन पहले वहां जाकर व्यवस्थाएं दुरुस्त कर लें। सफाई कर्मी को सूचित करें या फिर प्रधान माध्यम के सूचना कर बुलवा लें विद्यालय भवन और परिसर की सफाई करा दें।
कुछ प्रधानाध्यापकों ने विद्यालय की सफाई करवा दी जाने की सूचना दी है। जिन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों ने दो दिन पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं कराई है। एनपीआरसी से रिपोर्ट मंगाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। बताया कि किसी भी विद्यालय में बच्चों से सफाई नहीं कराई जाएगी। ऐसी शिकायतें मिलने पर प्रधानाध्यपक को दोषी माना जाएगा, तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।