विकास भवन के सभागार में शनिवार को जिला सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में जिलाधिकारी के न पहुंचने पर जनप्रतिनिधि भड़क गए। जिलाधिकारी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के बाद बैठक स्थगित कर दी। इसके बाद भाजपा के दो सांसद, एमएलसी समेत कई नेता पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और धरने पर बैठ गए। शाम को कमिश्नर से वार्ता के बाद उनके आश्वासन पर धरना खत्म हो गया। कमिश्नर ने भरोसा दिया कि आइंदा ऐसा नहीं होगा।
सुबह करीब 10 बजे बैठक की प्रक्रिया शुरू हुई। जिलाधिकारी के स्थान पर सदस्य सचिव के रूप में मुख्य विकास अधिकारी केके गुप्त पहुंचे। सांसद अशोक दोहरे ने डीएम के न आने का मुद्दा उठाया तो बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने सीडीओ से जिलाधिकारी कुमार रविकांत सिंह के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि वह छुट्टी पर हैं। उनके स्थान पर वह प्रभारी जिलाधिकारी के तौर पर आए हैं। इस पर सांसद ने फोन पर कमिश्नर से वार्ता की और बताया कि डीएम ने उनके स्तर से लिखित या मौखिक अवकाश नहीं लिया है। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
सांसद ने निंदा प्रस्ताव रखा, जिस पर सांसद अशोक दोहरे, एमएलसी अरुण पाठक, सिकंदरा विधायक इंद्रपाल पाल, ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि ठाकुर अनूप सिंह समेत कई विधायकों व ब्लाक प्रमुखों ने हस्ताक्षर किए। जब अधिकारियों से दस्तखत करने को कहा गया तो वे कन्नी काट गए और एक-एक करके बैठक से निकलकर चले गए। इस पर अन्य जनप्रतिनिधि भी घर चले गए।
अफसरों के रवैये को कोसते हुए बीजेपी के दोनों सांसद, एमएलसी व अन्य भाजपाइयों ने पैदल मार्च निकाला और फिर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना देकर बैठ गए। समर्थन में भाजपा जिलाध्यक्ष समेत अन्य नेता व कार्यकर्ता भी कलेक्ट्रेट पहुंचे नारेबाजी करने लगे।
विवाद की सूचना पर मंडलायुक्त मो. इफ्तखारुद्दीन माती कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां बंद कमरे में सांसद, सीडीओ, एसपी, एएसपी, डीडीओ समेत अफसरों व जनप्रतिनिधियों के बीच एक घंटे से अधिक समय तक वार्ता हुई। कमिश्नर ने कहा कि जो भी घटनाक्रम हुआ है वह गलत है। भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होगी। मामले को शासन के संज्ञान में लाया जाएगा। जनप्रतिनिधियों को आश्वस्त किया गया है कि उनको पूरा सम्मान मिलेगा।
उधर जिलाधिकारी कुमार रविकांत सिंह का कहना है कि विधिक प्रक्रिया के तहत मुख्य विकास अधिकारी प्रभारी जिलाधिकारी के तौर पर मीटिंग में पहुंचे। इसके बावजूद यदि समिति के अध्यक्ष सांसद को कोई आपत्ति थी तो उन्हें वार्ता कर अवगत कराते। उन्होंने कहा कि अन्य जो भी आरोप वे क्यों लगा रहे हैं ये तो वही जानें।