सप्ताह की शुरूआत से लेकर दो बार आई तेज आंधी-पानी से जिलेभर की ध्वस्त हुई बिजली व्यवस्था कई दिनों बाद अभी तक पटरी पर नहीं लौट सकी है। विभिन्न कस्बों व गांवों के सैकड़ों गांव पांचवें दिन भी अंधेरे में डूबे पड़े हैं। ऐसे में पानी के लिए कस्बों में हाहाकार मचा है। वहीं विद्युत महकमा दिन-रात टूटे पड़े पोलों की मरम्मत कर बिजली बहाल करने में जुटा हुआ है।
बताते चलें कि पिछले सोमवार व बुधवार को जिलेभर में तेज आंधी के साथ बारिश हुई थी। इसके चलते घरों में रखे छप्पर, टीनशेड आदि उड़ गए थे। तेज आंधी-पानी के चलते पोल व लाइनें तहस-नहस हो गई थी। वहीं बड़े-बड़े पेड़ भी आंधी से धराशायी हो गए, जिसके बाद जिलेभर के सभी कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था बेपटरी हो गई।
तेज आंधी-पानी के चलते जिलेभर में करीब 500 पोल ध्वस्त हुए थे। इससे करीब 650 गांव अंधेरे में डूब गए थे। आफत बनकर आई तेज आंधी-पानी के कई दिन बीतने के बावजूद अभी तक जिलेभर में बिजली व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट सकी है। अकबरपुर कस्बा क्षेत्र सहित जैनपुर फीडर से जुड़े दर्जन भर गांवों में शुक्रवार को बिजली की आवाजाही बनी रही। जबकि कई गांवों में अंधेरा पसरा हुआ है।
शिवली प्रतिनिधि के अनुसार अभी तक शिवली सबस्टेशन से जुड़े बैरी दरियांव, बैरी सवाई, सुजानपुर, जुगराजपुर बिठूर, बाघपुर, सूरजपुर, राजपुर, नहरी-बरी, गौरी व शोभन सबस्टेशन से जुड़े शिवली, कैलई, वक्तपुरवा, बसेन, भैथाना, बिरोहा सहित करीब 40 गांवों में अंधेरा पसरा हुआ है। झींझक प्रतिनिधि के अनुसार अभी तक क्षेत्र के विश्वबैंक, जलिहापुर, मकनियापुर, किशौरा, नासरसेड़ा, खम्हैला, द्वारिकागंज सहित करीब 200 गांवों में बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है। जबकि 18 विद्युत पोलों में सिर्फ 10 बिजली पोलों की मरम्मत हो सकी है।
वहीं रनियां प्रतिनिधि के अनुसार तेज आंधी-पानी से आए फाल्टों के चलते क्षेत्र के 60 गांवों में अंधेरा छाया हुआ है। वहीं एसडीओ आरएस वर्मा सभी गांवों में बिजली व्यवस्था बहाल होने में एक सप्ताह लगने की बात कह रहे हैं। इसी क्रम में मुंगीसापुर प्रतिनिधि के अनुसार फाल्टों के चलते अभी तक सभी 24 गांवों में बिजली व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी है। इसी तरह से जिले के अन्य कस्बा व गांवों में बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से बहाल नहीं हो सकी है।