नौबस्ता के आशु अपहरण के बाद हत्याकांड के मामले में पुलिस ने फर्जी आईडी पर प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचने वाले टेलीकॉम संचालक और डीलर पर सख्त कार्रवाई की है। दोनों की इस गलती की वजह से अपहरणकर्ता पुलिस को गच्चा देते रहे और पुलिस शातिरों तक नहीं पहुंच सकी। इसलिए पुलिस ने दोनों पर सख्त कार्रवाई की है। जिससे कि शहर में इस तरह का धंधा टेलीकॉम शॉप वाले बंद कर दें।
बारा अकबरपुर कानपुर देहात में रहने वाला बंटी नाम का युवक टेलीकॉम शॉप चलाता है। इसकी दुकान से अपहरणकर्ताओं ने तीन प्री-एक्टिवेटेड (बगैर आईडी दिए ब्लैक में एक्टिवेटेड सिम) सिम खरीदे थे। जबकि सिम खरीदने के लिए खरीदार को अपनी आईडी देनी होती है।
तीन दिन के भीतर कंपनी उसके बताए गए पते की पुष्टि करने के बाद टेलीकॉम कंपनी सिम को एक्टिवेट करती है। चंद रुपये के लालच में टेलीकॉम संचालक सिम की कीमत से कुछ रुपये अधिक लेकर एक्टिवेट सिम बेच दिया था। इस पर एसएसपी ने बंटी और कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर सर्वेश के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करने की धाराओं में कार्रवाई की है। एसएसपी शलभ माथुर और आईजी जकी अहमद ने फर्जी आईडी और प्री-एक्टिवेटेड सिम बेचने वालों के खिलाफ जल्द ही कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।
टेलीकॉम संचालक ने मात्र 60 रुपये प्रति सिम के हिसाब से तीन सिम बेचा था। जांच-पड़ताल में यह बात भी सामने आई है कि टेलीकॉम संचालक बंटी ने अपने मोबाइल से ही तीनों सिम एक्टिवेट भी किए हैं। इसलिए पुलिस ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई की है।