दिसंबर का प्रथम पखवारा बीत चुका है। लेकिन, नहरों के सहारे पड़ी सैकड़ों बीघे कृषि भूमि की अभी तक पलेवा नहीं हो पाई है। प्रमुख नहरों और रजबहों में जेसीबी से सफाई का कार्य कराया जा रहा है।
अभी तक मुश्किल से 60 फीसदी के आसपास ही नहरों की सफाई हो पाई है। विदित हो कि तहसील क्षेत्र की नहरों को सफाई के नाम पर नवंबर के प्रथम सप्ताह में ही बंद कर दिया गया था।
इधर, गेहूं की बुवाई का पीक सीजन पहली नवंबर से 25 नवंबर के बीच का है। इसके लिए खेतों की पलेवा किया जाना भी आवश्यक है। जबकि, 20 दिसंबर तक सिर्फ पिछैती गेहूं की ही बुवाई की जा सकती है।
किसानों ने बताया कि वह नहरों में पानी आने की आस लगाए बैठे रहे और गेहूं की अगेती बुवाई का समय निकल गया। सूखे की मार से बची-खुची खरीफ की धान, तिली, उड़द, बाजरा, तोरिया और अगहनी अरहर की फसलें काटने के बाद खाली हुए खेतों की पलेवा करने को वह इधर-उधर मारे-मारे घूम रहे हैं।
ऐसे में पिछैती गेहूं की फसल भी नहीं बो पाएंगे। बताया कि गत दिनों हुई हल्की बारिश से कुछ जगहों पर फसल की बुवाई की गई है। लेकिन, नमी के अभाव में वह सूख रही है।
धरमपुर बंबा, भदरस रजबहा और परास माइनर सहित कई नहरों/रजबहों में जेसीबी मशीन से सफाई का कार्य कराया गया है। इसके बावजूद भी अभी अधिकांश रजबहों में सफाई का काम आधा-अधूरा होने से समस्या है।
तहसील क्षेत्र के धरमपुर, भदरस, गिरसी, पतरसा और घाटमपुर रजबहों के अलावा तेजपुर, तिलसड़ा, कुंवरपुर, तरगांव, हथेही, भाट, पसेमा, बौहार, परास, नौरंगा, मड़ेपुर, जहांगीराबाद, रतनपुर और बरौली माइनरों के रक्बे में पड़ने वाले
किसानों ने बताया कि वह किराए पर (निजी नलकूपों) से प्लास्टिक के पाइपों के जरिये किसी तरह सूखे खेतों की पलेवा करने में जुटे हैं।
परास गांव निवासी अलकेश तिवारी, ओरिया गांव निवासी लल्लन दुबे, किवड़िया गांव निवास रमेश यादव और बलाहापारा गांव वंशगोपाल सिंह गौर ने बताया कि नहरों और रजबहों में पानी न आने से सैकड़ों बीघे खेत पलेवा करने को परती पड़े हुए हैं।