देवपुरा गांव निवासी जितेंद्र कुमार यादव के लाही के खेत पर जमीन में मोटी दरार पड़ी देखकर कुछ लोगों ने धरती फटने की अफवाह फैला दी। जब उसकी गहराई नापी गई तो वह सामान्य निकली। जिससे अफवाह पर विराम लग गया।
जितेंद्र ने बताया कि वह खेत में बोई लाही की फसल की सिंचाई कर रहा था। तभी उसे एक जगह पानी सिमटकर भरते दिखाई दिया। वहीं काफी दूर तक धरती में मोटी दरार फटी दिखाई दी।
बताया कि दरार की लंबाई तकरीबन 20 मीटर और चौड़ाई कहीं-कहीं छह इंच तक थी। उसकी गहराई एक-डेढ़ फिट से अधिक नहीं थी। नलकूप विभाग के अवर अभियंता रामवीर सिंह ने बताया कि खेतों में दरारें फटना कोई नई बात नहीं है।
बताया कि खेत के आसपास कहीं बंद कुआं अथवा गड्ढा होने से उसमें जैसे ही पानी भरता है तो उसके आसपास धरती की ऊपरी सतह में दरार पड़ना स्वाभाविक है।
बताया कि तालाबों और जलाशयों का पानी सूखने पर भी धरती मेें दरारें पड़ जाती हैं।