कानपुर देहात। गर्मी शुरू होते ही जिला प्रशासन ने बारिश के पहले 125 तालाब तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। सोमवार को तालाबों की पैमाइश व सीमाबंदी का काम होने लगा।
तालाबों की खुदाई एक अप्रैल से शुरू करके उन्हें बारिश के पहले पूरी तरह से तैयार कर दिया जाएगा। जिससे वर्षा के पानी को संरक्षित किया जा सके और आने वाले समय में गिरते जलस्तर पर रोक लगाई जा सके।
लोग जल संरक्षण के लिए जागरूक नहीं हो रहे हैं। जिले में गिरते जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए डीसी मनरेगा पीएन दीक्षित ने जिला प्रशासन के सहयोग से तालाबों के संरक्षण का अभियान शुरू किया है। इसमें अकबरपुर, भोगनीपुर, सिकंदरा, रसूलाबाद, मैथा, डेरापुर समेत सभी छह तहसीलों में कुल 125 तालाब चिह्नित किए गए हैं।
यह ऐसे तालाब हैं जो धरातल के बराबर हो गए हैं और उन पर अवैध कब्जे हैं। साथ ही जल भराव की गुंजाइश नहीं है। इन्हें कब्जामुक्त कराकर इनकी खुदाई के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। 9 मार्च को इस संबंध में सभी तहसीलों में बैठक हुई थी। जिसमें बीडीओ, लेखपाल, पंचायत सचिवों को तालाब की पैमाइश व सीमाकंन करने के बारे में बताया गया था।
डीसी मनरेगा ने बताया कि तालाबों का संरक्षण नहीं हुआ तो जलस्तर की गिरावट में रोक नहीं लगाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि सोमवार से सभी तहसीलों में टीमों ने काम करना शुरू कर दिया है। मैथा, मलासा, सरवनखेड़ा आदि सभी ब्लॉकों में तालाबों की पैमाइश करके उसकी सीमा निर्धारित करने के लिए चूना आदि डाला गया।
मनरेगा के श्रमिकों से तालाब के चारों ओर फावड़े से निशान बनाकर उसकी सीमा निर्धारित की गई। जिससे कोई अब दोबारा अतिक्रमण करने की कोशिश न करे। प्रशासन का मकसद है कि तालाब खुदवाने के बाद बारिश का जल उनमें संरक्षित किया जाए। इससे जलस्तर पर गिरावट रुक सके।
डीसी मनरेगा ने बताया कि पहले चरण में 125 तालाब चिह्नित किए गए हैं। इन्हें तैयार करने के बाद अन्य गांवों में काम शुरू कराया जाएगा।