उत्तर प्रदेश को कान्हा की नगरी महत्वपूर्ण दर्जा दिलाने जा रही है। पचास बरस पहले की पशु चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले यंत्रों की धरोहर यहां सहेजी जा रही है। ऐसे यंत्र जो अब नजर नहीं आते उनका भविष्य के पशु चिकित्सक और लोग दीदार कर सकेंगे। यहां के वेटरिनरी विश्वविद्यालय परिसर में ऐसा ही अनोखा म्यूजियम बनकर तैयार हो गया है। अब इसमें बस धरोहरें सजाने की तैयारी है। पशु चिकित्सा के क्षेत्र में यह उत्तर प्रदेश का पहला शैक्षिक म्यूजियम होगा।
वेटरिनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी सिंह इस म्यूजियम को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं। प्रो. सिंह ने बताया कि इस म्यूजियम में छात्रों का मार्ग दर्शन होगा और विजिटर भी इसमें आते ही विश्वविद्यालय के इतिहास से परिचित हो जाएंगे।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान के एजुकेशन म्यूजियम का शिलान्यास 19 मई 2010 को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली के उप महानिदेशक शिक्षा डा. अरविंद कुमार ने किया था। अब भवन का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है। इसमें रखी जाने वाले उपकरण और अन्य ऐतिहासिक चीजें सहेज कर एक जगह रख ली गई हैं। उद्घाटन होने के बाद सलीके से म्यूजियम में सब सजा दिया जाएगा।
पचास बरस पुरानी सुई और सिरिंज विशेष आकर्षण का केंद्र
म्यूजियम में पचास बरस पुरानी मोटी सुई और सिरिंज विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। वर्ष 1947 से 1950 के बीच के कई चिकित्सीय उपकरण जो अब दुर्लभ हो चुके हैं उन्हें भी म्यूजियम में रखा जाएगा। यह म्यूजियम बच्चों को विभिन्न फोटोग्राफ और इतिहास के जरिए भी शिक्षित करेगा।
वेटरिनरी विश्वविद्यालय मथुरा के पीआरओ मुकुल आनंद ने बताया कि उत्तर प्रदेश के पहले वेटरिनरी म्यूजियम का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है। विभागों से सामान एकत्र कर एक जगह रख लिए गए हैं। 21 जनवरी को इसके उद्घाटन की तैयारी है। इस म्यूजियम के जरिए विश्वविद्यालय के इतिहास के साथ ही छात्र यह भी समझेंगे कि किन परिस्थितियों में पहले पशु चिकित्सा की जाती थी।