महावीर जयंती महोत्सव में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
महावीर जयंती महोत्सव के अवसर पर मेला प्रांगण में मंगलवार को देर रात्रि कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। दूर-दराज से आए कवियों ने वीर रस, हास्य रस की कविताएं पढ़ी। राजनेता भी कवियों के निशाने पर रहे। सुबह 2.30 बजे तक चले कवि सम्मेलन में व्यंग्यों का आनंद उठाते रहे।
महरौली से आए कवि संजय पांडेय ने कहा कि अब तो चरित्रहीनों को भी, चरित्र प्रमाणपत्र मिलने लगे हैं। इसलिए कंपनी मेड ताले, लोकल चाबी से खुलने लगे हैं। कवियत्री मीरा दीक्षित ने पढ़ा कि ‘इन ना खुदाओ पे भी ऐतवार न रहा, इंसान के दिलों में आज प्यार न रहा, अश्कों में डूबे चांद को घेरे अंधेरे, अब चांद पर भी हंसी का खुमार न रहा’। अनिल तेजस्व ने वीर रस की कविता पढ़ी। उन्होंने पढ़ा कि तिरंगा हाथ में लेकर वतन का मान लिख देना। कलम में आग भरके विजय यशगान भर लिख देना। फकत है आरजू इतनी, मरु देश की खातिर, लहू के आखिरी कतरे से हिंदुस्तान लिख देना। कवि डा. भगवान मकरनंद ने हास्य कविता सुनाकर लोटपोट कर दिया। कहा कि जैसे नोट पुराने बदले, अभी बहुत कुछ बदलेगा। बीवी बदल पुरानी सबको, नई नई दिलवाएंगे। पृथ्वीपुर से आईं हेमा बुखारिया ने कहा कि कैकेयी का रूठना जरूरी है सब्र का टूटना जरूरी। आज हद पार कर चुके रावण, राम का वन गमन जरूरी है। यशपाल यश ने कहा कि कलम वीरानियों में भी, खुशी के गुल खिला देगी। हकीकत के स्वरों के संग, अपना स्वर मिला देगी। संचालन कर रहे सुरेंद्र सार्थक ने पढ़ा कि पत्नी ने गहनों को देखा, एक बार बस गोने पर। गिरवी किसी सेठ के घर है। बेटा शहर पढ़ाने को। सैफई के गौरव चौहान ने भी वीर रस्य की कविताओं को सुनाया। कवि सम्मेलन की अध्यक्ष प्रमोद कुमार जैन ने की। इस दौरान कमलेश जैन, आदेश जैन, अरुण जैन पीली कोठी, चंद्रप्रकाश जैन, योगेेंद्र प्रकाश जैन, नीतेश जैन, संजय जैन पीआरओ आदि रहे।