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वर्ल्ड हैप्पी डे : खुश रहना सीखा तो जीवन में आई बहार, तनाव भरा जीवन कर देता है बीमार

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फिरोजाबाद। यह जरूरी नहीं कि आपके पास भरपूर पैसा हो और आप खुश भी हो। ऐसे तमाम लोग हैं जिनके जीवन में पद, पैसा प्रतिष्ठा एवं अन्य सुख-सुविधाओं के साधन होने के बावजूद भी खुशी नहीं है। इस कारण मानसिक रोग, आत्महत्या एवं असामाजिकता का स्तर बढ़ रहा है। तनाव भरी जिंदगी में खुशी प्राप्त करने के लिए ये लोग तरह-तरह के प्रयास करते हैं। यहां तक कि लोगों ने मेडीटेशन, योग अन्य साधन अपनाएं हैं। ऐसे ही लोगों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 मार्च 2013 को अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस घोषित किया था।
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नकारात्मक लोगों से बचें
आजकल लोगों की उम्मीदें ज्यादा हो गई हैं। अधिक पाने के चक्कर में वह कभी-कभी नकारात्मक हो जाते हैं। इसलिए लोगों को अपना अधिकतर समय सकारात्मक लोगों के साथ बिताना चाहिए। नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं। कार्य में सफलता या असफलता जो भी मिले, हमें सकारात्मक सोच के साथ उसे स्वीकार करना चाहिए। हमेशा इस सोच के साथ जीवन में खुश रहना चाहिए कि जीवन में जो मुझे प्राप्त हुआ है, मैं उसके लिए सौभाग्यशाली हूं। भौतिक या कृत्रिम साधनों से प्राप्त खुशी अस्थाई होती है। - प्रोफेसर अमरप्रकाश, मनोविज्ञान विभाग, एसआरके पीजी कॉलेज।
1800 लोग नियमित लेते हैं खुशी की क्लास
खुशी जिंदगी का सबसे बड़ा आहार है। हम लाफिंग क्लब में जाते हैं खुश रहने के लिए। जो अस्थाई खुशी है। स्थाई खुशी के लिए हमें विचारों का परिवर्तन करना चाहिए। हम नि:शुल्क सात दिवसीय कोर्स कराते हैं, उसमें बताते हैं कि हम कौन हैं, हमारा लक्ष्य क्या है, मेडीटेशन की सही विधि बताते हैं। इससे स्वभाव में परिवर्तन आा है। परिवार में कलह, तलाक से पीड़ित, शारीरिक रूप से अस्वस्थ निराश होकर आते हैं। हम उनके विचारों को खुशी देते हैं। कईयों के जीवन में परिवर्तन आया है। शहर के सात केंद्रों पर 1800 लोग नियमित आते हैं। - सरिता दीदी, संचालिका, ब्रह्मकुमारी प्रजापिता विश्वविद्यालय।
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कविताएं लिखकर मन को मिलती है शांति
तनाव में हर व्यक्ति के जीवन में है। मैं जब भी तनाव महसूस करती हूं तो कविताएं लिखना शुरू कर देती हूं। इससे मेरे मन को शांति मिलती है। यूनिसेफ ने मुझे काउंसलर भी बनाया है। इसलिए तनाव से पीड़ित बहुत लोग फोन करते हैं। मैं उनको सकारात्मक रहने की सलाह देती हूं और जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सकारात्मक होकर मुकाबला करना सिखाती हूं। काउंसलिंग के बाद कईयों के परिवार टूटने से बचे हैं। - डॉ. संध्या द्विवेदी, प्रोफेसर, एमजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज।
योग से पा रहे खुशी
लोग तनावपूर्ण जिंदगी में बीमार होते जा रहे हैं। जो तनाव रहित है, वो स्वस्थ है। मैं 35 वर्षों से लगातार गांधी पार्क में योग करने के लिए आ रहा हूं। मुझे योग करने में खुशी मिलती है। 70 से ज्यादा उम्र होने के बाद भी मैं अपने को फिट मानता हूं। यहां लोगों के साथ मिलकर सामूहिक रूप से हंसते हैं। जो एक योग भी है और तनाव रहित रहने का अच्छा प्रयास भी। लोगों को भी तनाव भरी जिंदगी में योग अवश्य करना चाहिए। - कैलाशचंद्र वर्मा, कोटला पजाबा।
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