भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में लापरवाही महिलाओं को दिल रोगी बना रही हैं। महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले दिल की बीमारी होने का खतरा दुगना हो गया है। निशाने पर हैं 35 से 55 साल की महिलाएं सबसे ज्यादा हैं। ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में शहरी महिलाएं इसकी शिकार हो रही हैं। वहीं वे महिलाएं भी ज्यादा प्रभावित है, जिन्हें घर और ऑफिस दोनों जगह काम करना पड़ रहा है। भारत में इनकी संख्या बढ़ रही है। 24 लाख लोग इससे हर साल मरते हैं और 12 लाख लोग अस्पताल पहुंचने से पहले मर जाते हैं।नजरअंदाज होती महिलाएं
बता दें कि मेडिकल क्षेत्र में दिल से जुडी बीमारियां पुरुषों में ज्यादा मानी जाती थी लेकिन एक स्वास्थ्य सर्वे ने इसको नकारते हुए महिलाओं को अधिक दिल का रोगी बताया। स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार अब पुरुष नहीं क्योंकि दिल का दर्द अब महिलाओं को ज्यादा सता रहा है। महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले दुगना तनाव होता है। हाइपरटेन्शन, हाई बल्ड प्रेशर और हार्ट अटैक अब महिलाओं के साथी बन गए हैं। अब कामकाजी महिलाओं को दिल की बीमारी होने की संभावना, पुरुषों से कहीं ज्यादा हो गई है।
बड़े शहर क्या अब तो छोटे शहरों में भी महिलाएं नौकरीपेशा हो गई हैं। यानि हमेशा से घर के काम का भार उठाने वाली महिलाएं अब घर के बाहर का काम भी करने लगी हैं। इसे डॉक्टर डबल ज्योपार्डी कहते हैं। और इसकी वजह से महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले दुगना तनाव होता है और दिल की बीमारी होने का रिस्क भी दुगना हो जाता है।
फीरोजाबाद जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ डा. आर के पांडे बताते हैं कि महिलाओं में खानपान की आदतों और अस्वास्थ्यकर चीजें खाने-पीने की वजह से ये खतरा धीरे-धीरे और बढता जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. रामकुमार गुप्ता पूरे देश से जीवनशैली में सुधार की अपील करते हैं और कहते है,
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के दिल से जुड़ी परेशानियों पर परिवार में कम ध्यान दिया जाता है। महिलाओं से जुड़ी खतरनाक बीमारियों की लिस्ट में दिल नहीं बल्कि ब्रेस्ट, यूटरीन और ओवेरियन कैन्सर आते हैं। जाहिर है कम जानकारी की वजह से महिलाएं दिल की बीमारी से जुड़े सिम्पटम्स को समय रहते नहीं पहचान पातीं। इससे उपचार में देरी होती है औां कई बार बीमारी का पता चलते-चलते बहुत देर हो जाती है।
महिलाओं में बढ़ती दिल की बीमारी खास तौर पर 35 से 55 साल में हो रही है। डॉक्टर बताते हैं कि पहले महिलाओं में दिल की बीमारी 60 साल की उम्र के बाद यानि मोनेपोज के बाद ही होती थी। जीवनशैली में परिवर्तन के चलते 35 से 55 की उम्र में उनका होर्मोनल बैलेन्स बिगड़ता जा रहा है। नतीजा ये कि अब वो भी पुरुषों की तरह, बल्कि पुरुषों से ज्यादा, दिल की बीमारी का शिकार हो रही हैं।
शिकार बनती युवा महिलाएं
गौरतलब है कि दिल की बीमारी अब युवा महिलाओं को अपनी चपेट में लेने लगी है। ये बीमारी महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है उसमें भी वो औरतें जो नौकरीपेशा हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जीवनभर साथ रहने वाली ये बीमारी कम उम्र में होने का ये चलन काफी चिंताजनक है।
दिल ढूंढता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन, जब अपने लिए और अपने अपनों के लिए समय की तंगी नहीं थी ये फिर शायद नहीं। दिल ये सब अब नहीं ढूंढता क्योंकि दिल अब तेजी से धड़कता है। उसे आदत हो गई है आगे रहने की, तेज चलने की, अव्वल आने की, अब इस दौड़भाग में जो छूट रहा है उसका पता फौरन तो चलता नहीं और जब पता चलता है तो देर हो चुकी होती है, आदत पड़ जाती है। तब तक हमारा दिल बीमारियों की चपेट में आ चुका होता है।