पंचायत चुनाव कराने से पूर्व जनगणना 2011के आधार पर
बढ़ी आबादी के हिसाब से ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के
वार्डों का गठन किया जाना है। अभी तक जिले में जिला पंचायत के वार्डों की
संख्या 28 थी। लेकिन अब यह संख्या 34 तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही
जिला पंचायत के वार्डों का गठन होने के साथ ही इस चुनाव में भाग्य आजमाने
वाले राजनीति के खिलाड़ियों ने अभी से गुणा भाग लगाना शुरू कर दिया है।
इतना ही नहीं वार्ड को जीतने के हिसाब से गठन कराने की जुगत भी भिड़ाई जा
रही है। लेकिन नियमावली को दर किनार ही करना अफसरों को भारी पड़ सकता है।
सचिव पंचायती राज विभाग चंचल तिवारी के द्वारा जारी आदेश में साफ कहा है कि
ग्राम पंचायतों में पूर्व के वार्डों की जनसंख्या में भाग देना होगा। उसी
के हिसाब से वार्डों का गठन हो जाएगा। वहीं क्षेत्र पंचायत की कुल आबादी
में दो हजार के हिसाब से भाग देने के बाद यदि शेष बची जनसंख्या यदि आधे एक
हजार से अधिक है तो फिर एक नया वार्ड बनेगा।
वहीं जिला पंचायत के वार्डों
का गठन करने के ही दौरान कुल आबादी के हिसाब में 50 हजार का भाग दिया
जाएगा। भाग देने के बाद शेष आबादी यदि आधी से कम है तो नया वार्ड नहीं
बनेगा लेकिन यदि आधे से अधिक हो जाती है तो नया वार्ड बना दिया जाएगा।
लेकिन इनमें भी क्षेत्र पंचायत का कोई वार्ड किसी वार्ड से अधूरा नहीं
छोड़ा जाएगा। इसके साथ ही किसी परिवार के सदस्यों के नाम दो-दो वार्ड में
नहीं होने चाहिए। प्रत्येक परिवार के वोटर एक ही वार्ड में रहेंगे। यदि अलग
हुए तो भी गलत होगा। वार्ड का गठन करने के साथ ही मानचित्र भी बनाना होगा।