फिरोजाबाद। मौसम में बदलाव के साथ ठंड आने का असर सबसे ज्यादा बच्चों की सेहत पर पड़ने लगा है। बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक के अंदर खुजली होना जैसी तमाम समस्या को लेकर निजी और प्राइवेट अस्पताल में अभिभावक बच्चोें को लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इसे सामान्य सर्दी जुकाम के नहीं बल्कि एलर्जिक राइनाइटिस बीमारी बता रहे हैं। बृहस्पतिवार को अस्पताल की ओपीडी और बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की ओपीडी पर मरीजों की भीड़ रही।
बदलते मौसम के साथ सर्दी, जुकाम, बुखार आदि से परेशान होकर मरीज सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। चूंकि बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, ऐसे में वो जल्दी ही इस रोग की जद में आ रहे। इस बीमारी में बच्चों को बार-बार छींक आना, नाक बहना, नाक बंद हो जाना आदि समस्याएं होती हैं, इस समय अस्पताल से लेकर प्राइवेट बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों के पास एलर्जिक राइनाटिस से ग्रसित बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। अस्पताल में ही 20 से 25 बच्चे इस समय डॉक्टरों के यहां आ रहे हैं तो प्राइवेट डॉक्टरों के यहां भी इस समस्या से ग्रसित बच्चे पहुंच रहे हैं। डॉक्टर के अनुसार, इस समस्या से कुछ सावधानी रखकर बचा जा सकता है।
गंभीरता से लें, नहीं तो हो सकती है दिक्कत
- बाल रोग विशेषज्ञ के विभागायक्ष डाॅ. एलके गुप्ता ने बताया कि एलर्जिक राइनाटिस की समस्या सामान्य सर्दी जुकाम नहीं है। दरअसल कुछ बच्चों को परागकण, धूल, धुआं, धुंध से एलर्जी होती है। इनके संपर्क में आने पर म्यूकस में ब्रेन में सूजन आ जाती है, जिस कारण बदलते मौसम में ऐसे बच्चों को राइनाटिस की समस्या होती है। इसके अलावा जिन बच्चों की नाक की हड्डी टेड़ी (डेविएटिड नेजल सेप्टम) होती है, उनमें भी यह समस्या ज्यादा होती है। इन बच्चों को राइनाटिस के साथ साइनोसाइटिस भी हो सकती है।