फिरोजाबाद। ट्रांसपोर्ट नगर बसाने आ रही अड़चन को दूर करने के लिए सोमवार को डीएम चंद्र विजय सिंह ने विकास प्राधिकरण के सभागार में शहर के प्रमुख ट्रांसपोर्टरों और विकास प्राधिकरण अधिकारियों के साथ एक बैठक की। ट्रांसपोर्टरों ने 4200 रुपये फीट के हिसाब से जमीन लेने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। ट्रांसपोर्टर 1500 रुपये फीट के हिसाब से जमीन देने की मांग करते रहे।
राजा का ताल के समीप ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के लिए विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2008 में किसानों की करीब 13.76 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की थी। इसकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है। इस जमीन को बेचने के बाद किसानों को जमीन का मूल्य विभाग से वापस किया जाना है। विकास प्राधिकरण जमीन को 42000 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से बेच रहा है। इस रेट में ट्रांसपोर्टर जमीन लेने के लिए तैयार नहीं हैं। जबकि जमीन बेचनेे के लिए विभाग ने एक मार्च से 30 जून तक आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन शुरू किया था। इसके बाद भी किसी भी ट्रंासपोर्टर नेेेेेे जमीन खरीदने के लिए आवेदन नहीं किया।
सोमवार को डीएम चंद्र विजय सिंह की अध्यक्षता में शहर के ट्रांसपोर्टरों के साथ एक बैठक की गई। बैठक में विप्रा अधिकारियों के साथ नगर विधायक मनीष असीजा, नगर मजिस्ट्रेट अजय कुमार तिवारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों से जमीन खरीदने के लिए कहा तो ट्रांसपोर्टरों ने 42000 रुपये रेट पर जमीन लेने से इनकार कर दिया। ट्रंासपोर्टरों का कहना था कि फैक्टरी संचालक को जमीन 1500 रुपये मीटर दी जा रही है, तो हम लोग इतनी महंगी जमीन क्यों खरीदेंगे। ट्रांसपोर्टर दिन में एक से दो हजार रुपये प्रतिदिन कमाता है। ऐसे में वह इतनी महंगी जमीन नहीं खरीद सकता।
1500 रुपये फीट के हिसाब से यदि विभाग जमीन देगा तो हम लोग जमीन खरीद लेंगे। यदि प्रशासन ने नो एंट्री के नाम पर दी प्रशासन सख्ती बरती तो 80 फीसदी ट्रंासपोर्ट बंद हो जाएंगे। जमीन बेचने के लिए अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों को ऋण दिलाने की पहल की।
इतनी महंगी जमीन लेने की हैसियत ट्रांसपोर्टरों की नहीं है। यदि प्रशासन चाहे तो वह ट्रांसपोर्टरों का सर्वे करा सकता है। दिन भर में हजार पांच सौ रुपये ही कमाई हो पाती है। ऐसी स्थिति में 4200 रुपये फुट की जमीन नहीं खरीदी जा सकती।
अधिकारियों ने कहा कि कम से कम दस प्रतिशत ट्रांसपोर्ट जमीन खरीदने के लिए आवेदन करें तो आगे शासन से बात की जाएगी। प्रशासन की इस बात पर भी ट्रांसपोर्ट राजी नहीं हुए।
मास्टर प्लान के अनुसार विभाग ने सात मीटर चौड़ी सड़क देने के साथ ही अन्य जगह भी घेर ली है। इसके बाद रेट भी आसमान छू रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टर जगह नहीं ले सकता।
राज नारायन गुप्ता मुन्ना, ट्रांसपोर्टर
यूपीएसआईडीसी में जगह की कीमत 1500 मीटर है। ट्रांसपोर्ट नगर में विभाग ने 4200 रुपये फीट के हिसाब से जगह दी है। सिक्सलेन के पास सस्ती दर में जगह उपलब्ध करा दी तो ट्रांसपोर्टर वहां भी चला जाएगा।
अमित गर्ग, ट्रंासपोर्टर
ट्रांसपोर्ट नगर शहर के विकास और व्यापार के लिए आवश्यक है। लेकिन जगह मार्केट रेट के हिसाब से हो। इतनी महंगी जगह ट्रांसपोर्ट नहीं ले सकता।
हरीशंकर तिवारी, ट्रांसपोर्टर
इतनी महंगी जगह ट्रांसपोर्टर नहीं खरीद सकता। विभाग को जगह के दाम कम करना चाहिए। अन्यथा किसी अन्य स्थान पर कम दाम पर जगह उपलब्ध करानी चाहिए। तो ट्रांसपोर्ट नगर बस सकता है।
राकेश कुमार तिवारी
ट्रांसपोर्टर रेट कम करने की बात कह रहे है जबकि सर्किल रेट के हिसाब से तीन गुना अधिक पर जमीन खरीदी गई है। इसलिए रेट कम करने में दिक्कत आ रही है। किसानों का करीब 45 करोड़ रुपया बकाया है। किसान रुपये मांग रहे है।
कप्तान सिंह, अधिशासी अभियंता विकास प्राधिकरण
नगर विधायक मनीष असीजा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर में जमीन के रेट काफी अधिक हैं। विकास प्राधिकरण को ऐसा प्लान तैयार करना चाहिए कि जिससे रेट कम हों। ट्रांसपोर्ट नगर का जिस तरह से मास्टर प्लान बनाया गया है उसमें काफी जगह खाली छोड़ी है। यह कैसे कम हो सकती है इस पर भी विप्रा विचार करे। रेट को लेकर शासन स्तर पर भी वह बात करेंगे।
शहर में जितनी भी ट्रांसपोर्ट कंपनियां हैं उनके ट्रक हाईवे किनारे और सर्विस रोड पर ही खडे होते हैं। इससे शहर में जाम की स्थिति बनती है। कभी फाइलों तो रेट में ट्रांसपोर्ट नगर उलझ कर रह गया है। जबकि शहर में बढ़ते वाहनों के दवाब के कारण ट्रांसपोर्ट नगर जरूरी है।