सावन का महीना भक्ति के लिए काफी पवित्र माना जाता है। इसे धर्म-कर्म का माह भी कहा जाता है। सावन महीने का धार्मिक महत्व काफी ज्यादा है। बारह महीनों में से सावन का महीना विशेष पहचान रखता है। इस दौरान व्रत, दान व पूजा-पाठ करना अति उत्तम माना जाता है व इससे कई गुणा फल भी प्राप्त होता है। इस बार का सावन अपने आप में अनूठा होगा। इस बार 144 साल बाद सावन महीने में सौभाग्य योग बनेगा। श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासा उत्साह है।
शिव आराधना के लिए विशेष फलदायी पवित्र सावन माह एक अगस्त से शुरू होगा। इस बार यह महीना 29 दिन का रहेगा। पूरे माह श्रद्धालु शिव आराधना में लीन रहेंगे। सावन की शुरुआत सर्वार्थ सिद्धि योग के शुभ संयोग में हो रही है, इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया है। शनिवार को पवित्र सावन महीने की शुरुआत के साथ ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। श्रावणी पूजा के लिए शिवालयों में तैयारियां भी पूरी हो गई हैं। भगवान भोलेनाथ के भक्त गंगाजल लाकर बाबा को अर्पित करने की तैयारी में लगे हैं, वहीं बाजार में पूजन सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ गई है। भगवान शंकर को रिझाने के लिए भक्त कांवड़ भी बना रहे हैं। गंगाजल लाने के लिए कांवड़िये ‘ओम नम: शिवाय’ लिखे भगवा वस्त्र खरीद रहे हैं। शहर के शिवालयों की साफ-सफाई के साथ रंगरोगन किया गया है। मंदिर आदि में सावन महीने में कार्यक्रम होंगे।
सावन के पहले दिन यह होगा संयोग
सोमवार व्रत का महत्व
इस बार एक अगस्त की सुबह 7:42 तक श्रवण नक्षत्र रहेगा। सुबह 11:02 मिनट तक आयुष्मान योग रहेगा। दोपहर 1:09 से दो अगस्त की सुबह 5:19 तक द्विपुष्कर योग रहेगा, जिसे सौभाग्य योग भी कहते हैं।
सावन के महीने में इस बार चार सोमवार
तीन अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त के साथ ही दो प्रदोष 11 अगस्त और 27 अगस्त होगा। इन दिनों में शिव मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। कई जगह महारुद्राभिषेक भी होंगे।
जो भक्त पूरे महीने उपवास नहीं कर सकते वे श्रावण मास के सोमवार का व्रत कर सकते हैं। सोमवार के समान ही प्रदोष का महत्व है। इसलिए श्रावण में सोमवार व प्रदोष में भगवान शिव की विशेष आराधना की जाती है। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार श्रावण में ही समुद्र मंथन से निकला विष भगवान शंकर ने पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। इसलिए इस माह में शिव आराधना करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।
ऐसे करें सावन में शिव का पूजन
सावन के सोमवार के व्रत में भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठें। पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें। घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करने से मनोवांछित फल मिलता है। अभिषेक में महादेव को जल, दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, गंगाजल, गन्ना रस आदि से स्नान कराया जाता है। अभिषेक के बाद बेलपत्र, समीपत्र, दूब, कुशा, कमल, नीलकमल, आक, मदार, कनेर, राई फूल आदि से शिवजी को प्रसन्न किया जाता है। इसके साथ की भोग के रूप में धतूरा, भांग और श्रीफल महादेव को चढ़ाया जाता है। हल्दी, रोली, पान, सुपारी, पुष्प और नारियल अर्पित करने का विधान है।
बेलपत्र और समीपत्र का महत्व
भक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र और समीपत्र चढ़ाते हैं। इस संबंध में एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब 88 हजार ऋषियों ने महादेव को प्रसन्न करने की विधि परम पिता ब्रह्मा से पूछी तो उन्होंने बताया कि महादेव सौ कमल चढ़ाने से जितने प्रसन्न होते हैं, उतना ही एक नीलकमल चढ़ाने पर होते हैं। ऐसे ही एक हजार नीलकमल के बराबर एक बेलपत्र और एक हजार बेलपत्र चढ़ाने के फल के बराबर एक समीपत्र का महत्व होता है।
मंदिरों में सजावट
सावन में शिव मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। शिवभक्त अनेक धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। साथ ही, महादेव को प्रसन्न करने के लिए किसी ने नंगे पांव चलने की ठानी, तो कोई पूरे महीने अपने केश नहीं कटाएगा। वहीं, कई लोग मांस और मदिरा का त्याग कर देते हैं।