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तीन करोड़ रुपये की मशीनें कोविड अस्पताल में फांक रही धूल

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जिला अस्पताल स्थित कोविड आइसोलेशन ब्लॉक में पसरा पड़ा सन्नाटा - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। जनता के पैसे की सरकार अमला कैसे बरबादी करता है, अगर ये देखना हो तो कोविड अस्पताल को देखा जा सकता है। कोरोना संक्रमण काल में इमरजेंसी सेवा के लिए मंगाई गई करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की मशीनें धूल फांक रही हैं। करीब पांच माह से इन मशीनों का इस्तेमाल तक नहीं किया गया। अगर कुछ दिन इन मशीनों का और नहीं चलाया गया तो तकनीकी खराबी आ सकती है जिसे ठीक करने के लिए फिर लाखों रुपये खर्च किए जाएंगे।
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फिरोजाबाद जिले में एक अप्रैल 2020 से कोरोना संक्रमित मिलना शुरू हो गए थे। ऐसे में अस्पताल में 30 बेड का कोविड अस्पताल बनाया गया। मरीजों की संख्या बढ़ी तो सौ शैया अस्पताल में 172 कोरोना संक्रमित मरीजों के भर्ती होने की व्यवस्था की गई। यहां पर करीब दो करोड़ रुपये से अधिक के 100 से भी अधिक वेंटिलेटर भी खरीदे गए। हर बेड पर मॉनिटर और अन्य मशीनें लगाई गई। एक करोड़ रुपये से अधिक धनराशि का आईसीयू बनाया गया। जिले में करीब पांच माह से कोरोना की स्थिति काबू में है। इसलिए कोरोना अस्पताल का अधिकांश भाग लंबे से बंद हैं। ऐसे में अत्याधिक मशीनें धूल फांक रही हैं। यदि इन मशीनों को लंबे समय तक उपयोग में नहीं लाया गया तो ये मशीनें कंडम हो सकती हैं।
कोविड अस्पताल की सुविधा पर नजर
- पलंग 172
- आईसीयू बेड-30
- वेंटिलेटर 111
वेंटीलेटर के अभाव में प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराते हैं मरीज
कोविड अस्पताल के अलावा बात करें तो वेंटिलेटर की ज्यादा सुविधा मेडिकल कॉलेज में बेहतर नहीं है। यही कारण है कि मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने को मजबूर होना पड़ता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
कोरोना मरीज मिलना कम हुए हैं, मगर पूरी तरह बंद नहीं हुए। ऐसे में कोई आदेश नहीं आया कि कोविड अस्पताल को बंद किया जाए। कई प्रदेशों में मरीज बढ़ रहे हैं तो हम भी उन परिस्थितियों से निपटने को तैयार हैं। इसलिए मशीनों को नहीं हटाया है। मशीनों की देखभाल कराई जाएगी।
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डॉ. नीता कुलश्रेष्ठ, सीएमओ
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