फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में अत्याधुनिक मशीनें तो आवश्यकता से अधिक लग रही हैं। लेकिन, चिकित्सकों की कमी की ओर ध्यान नहीं है। जिले में किड़नी रोगियों के उपचार के लिए नेफ्रोलॉजिस्ट ही नहीं है। मेडिकल कॉलेज की डायलिसिस यूनिट सिर्फ टेक्निशियन रामभरोसे संचालित हो रही है। यूनिट शुरू हुए छह साल से अधिक समय हो गए, लेकिन डायलिसिस कराने के बाद उपचार कराने के लिए मरीजों को आगरा की दौड़ लगानी पड़ती है।मेडिकल कॉलेज में छह साल पूर्व डायलिसिस यूनिट की शुरुआत की गई थी। इस यूनिट को धीरे-धीरे 10 बेड से बढ़ाकर 20 पलंग तक कर दिया गया है। यहां तीन शिफ्टों में 40 से ज्यादा मरीजों की, लेकिन यहां नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हुई है। इससे डायलिसिस के दौरान मरीज को दिक्कत होने पर मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों को बुलाया जाता है। तब तक मरीज को टेक्निशियन ही संभालते हैं।
डायलिसिस के दौरान दिक्कत होने पर जा सकती जान
-चिकित्सकों के मुताबिक, डायलिसिस के दौरान कभी-कभी समस्याएं आ जाती हैं। डायलिसिस के दौरान मरीज का अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ या घट सकता है। इससे हार्ट अटैक होने से जान भी जा सकती है। शुगर का स्तर जल्दी कम हो जाता है। डायलिसिस के दौरान एक चिकित्सक की उपस्थिति अनिवार्य है।
20 पलंग की डायलिसिस यूनिट संचालित हो रही है। जब फिजिशियन की जरूर होती है तो मेडिसन विभाग से बुलाए जाते हैं। नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती मेडिकल कॉलेज में नहीं है।
प्रवेश कुमार, प्रबंधक डायलिसिस यूनिट