फीरोजाबाद। रमजान का पाक माह शुरू होने में भले एक सप्ताह शेष हो लेकिन घर-घर तैयारी होने लगी हैं। दूसरी तरफ नगर निगम की तैयारियां कागजों में सिमट कर रह गई हैं। नई आबादी वाले मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के हालात बद से बदतर हैं। गलियां कच्ची हैं, नालियों के पानी की निकासी नहीं हो रही।
चिश्ती नगर के मोहम्मदी मस्जिद के बाहर नाली महीनों से साफ नहीं की गई। मस्जिद तक जाने को लोग ईंटों को रखकर निकलने को विवश हैं। कच्ची गलियों में सिर्फ पत्थरों को ही डलवाकर चुप्पी साध ली। लोगों ने कहा कि हमें तो गांवों जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रहीं।
नूर नगर स्थित नूरी मस्जिद के करीब तो हालात और भी खराब हैं। मस्जिद की ओर जाने वाला हर रास्ता दल-दल में तब्दील है। गंदा पानी मस्जिद के करीब ही जमा होता। शुक्रवार को वहां विकलांग नमाजी की ट्राई साइकिल फंस गई। अमर उजाला टीम को देखकर लोग बोले आप ही कुछ करो, कम से कम रमजान तक व्यवस्थाएं तो सुधरें। मोटर पंप लगी थी लेकिन पानी नहीं निकल पा रहा था। यह हाल अन्य मस्जिदों के पास का भी है।
विकास तो दूर सफाई तक नहीं होती
- नसीमुद्दीन ने कहा कि पालिका एवं निगम में कोई अंतर नहीं दिखाई दिया। नई आबादी को विकास के नाम पर ठेंगा दिखाया गया। गलियां कच्ची हैं मस्जिदों के आस-पास गंदगी का अंबार, सफाईकर्मी तो आते ही नहीं। कोई सुनवाई नहीं होती है।
- नूरी मस्जिद के खजांची सैय्यद इफ्तखार अहमद ने कहा कि मस्जिद के करीब सफाई कराने एवं गलियों को बनाने के लिए निगम के कई चक्कर लगाए लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया।
- नूरनगर निवासी सैय्यद जैकब अली ने कहा कि निगम के अधिकारी तो सुनते ही नहीं हैं। रमजान के माह करीब ही आ गया अब तो सुधार कराना चाहिए। ताकि पाक होकर घरों से आने वाले लोग इबादत कर सकें।
सीवर लाइन पड़ी, नहीं बनीं गलियां
नई आबादी वाले क्षेत्रों का हाल यह है कि सीबर लाइन तो डाल दी गई लेकिन गलियां एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी नहीं बनीं।