नई करेंसी खत्म हुई तो 10 घंटे बंधक रहा नवजात का शव
संजीवनी हास्पिटल में डाक्टर ने बिल के अवशेष 3400 रुपये के लिए चलन के नोट लाने को कहा
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। इसे 500-1000 के नोट बंद होने का असर कहें या अस्पताल की बेरहमी, जो भी है, मृत नवजात भी इसका शिकार हो गया। जलेसर रोड स्थित संजीवनी हॉस्पिटल में रविवार को जन्म के कुछ देर बाद बच्चे की मौत हो गई। अस्पताल ने नई करेंसी में भुगतान के बाद ही शव ले जाने की शर्त रख दी। परिवारीजन कुल बिल में मात्र 3400 रुपये की नई करेंसी नहीं जुटा पाए। अस्पताल ने अवशेष भुगतान में पुराने नोट नहीं लिए। प्रसूता और परिजन 10 घंटे तक नवजात का शव लेकर अस्पताल में बैठे रहे। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही वह घर जा सके।
पिडसरा निवासी शशि(लालवती) पत्नि राजेश कुमार को प्रसव पीड़ा होने पर जलेसर रोड स्थित संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार दोपहर तीन बजे महिला ने बच्चे को जन्म दिया। चिकित्सक ने उनसे आठ हजार रुपये मांगे, शशि के परिजनों ने 4600 रुपये (दो हजार के दो नोट, बाकी सौ के नोट) जमा कर दिए। नौ सौ रुपये सफाईकर्मी एवं अन्य स्टाफ ने ईनाम के तौर पर ले लिए। कंपाउंडर को खुले पैसे नहीं दिए तो वह परिवारीजनों से झगड़ गया। रविवार- सोमवार की रात्रि एक बजे लालवती ने बच्चे को देखा कि वह कोई हरकत नहीं कर रहा। परिजनों ने कंपाउडर को जगाया ,लेकिन उसने देखने से मना कर दिया। चिकित्सक मनोज झिंदल मिन्नतों के बाद नवजात को चेक करने और नवजात को मृत घोषित कर दिया। इसके साथ ही चिकित्सक ने बकाया रुपये मांगना शुरू कर दिया। परिजनों ने कहा के उनके पास पांच -पांच सौ का नोट है। 500 के नोट को चार सौ रुपये में चलाने को कहा, तो भी चिकित्सक ने महिला एवं मृतक नवजात को ले जाने नहीं दिया। सुबह दस बजे तक परिजन मृत बच्चे को अस्पताल में लेकर बैठे रहे। बाद में पुलिस पहुंची। इसके बाद ही परिजन मृतक बच्चे को लेकर घर जा सके।
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बच्चा नार्मल पैदा हुआ था। डाक्टर ने कहा था कि हमारे बिल का भुगतान कर जच्चा- बच्चा को डिस्चार्ज करा लो। हमारे पास खुले पैसे जितने थे सब दे दिए। आधे से अधिक बिल का भुगतान कर दिया था। हमने डाक्टर साहब से कहा कि 1000 - 500 के नोट है वह ले लीजिए नहीं तो हम बाद में पैसे दे जाएंगे। डाक्टर खुले पैसे देने के बाद ही डिस्चार्ज करने पर अड़े थे। हमें तो ऐसा लग रहा है कि डाक्टर ने खुले पैसे न होने के कारण ही बच्चे की केयर पर ध्यान नहीं दिया। इस कारण उसकी मौत हो गई। उसकी डैड बॉडी ले जाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी।
ओमकार , नवजात के चाचा एवं तीमारदार
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हमने बाजार में चल रहे करेंसी मांगी थी, क्योंकि सरकार ने हजार-पांच सौ के नोट बंद कर दिए हैं। परिजनों ने पैसे नहीं दिए। बच्चे की आकस्मिक मौत हुई हैं, हमारी कोई लापरवाही नहीं है।
डा. मनोज झिंदल, संजीवनी हास्पिटल