फोटो 31 श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के बाद उनके स्वरूपों से आशीर्वाद लेते भक्त। स्रोतः संस्था
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फिरोजाबाद। शहर के गोपाल आश्रम में श्री किशोरी कृपा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन भक्ति की धारा बही। कथा व्यास आचार्य निशांत मिश्रा ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भव्य वर्णन किया। इस दौरान आश्रम परिसर में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह संपन्न हुआ, जिसमें महिलाओं ने मंगल गीत गाकर नृत्य किया और बधाइयां बांटीं।
आचार्य ने इंद्र मान मर्दन और गोवर्धन पूजा प्रसंग बताते हुए कहा कि गोवर्धन पूजा वास्तव में प्रकृति की पूजा है। उन्होंने भक्तों से अपील की कि यदि हमारे वृक्ष, नदियां और पर्वत सुरक्षित नहीं रहेंगे तो सृष्टि का क्रम बिगड़ जाएगा। प्रकृति की रक्षा ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। कथा के दौरान अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की तृतीय वर्षगांठ पर भी हर्ष व्यक्त किया गया। इस दौरान घंटाघर बाजार समिति द्वारा सभी भक्तों को खीरमोहन का प्रसाद वितरित किया गया।