फिरोजाबाद। ईरान-इस्राइल-अमेरिका युद्ध के कारण नैचुरल गैस आरएलएनजी की आपूर्ति में हुई भारी कटौती ने स्थानीय कांच और चूड़ी उद्योग की कमर तोड़ दी है। चूड़ी, माउथब्लोइंग और कांच बोतल इकाइयों में उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की कटौती कर दी गई है। अनुबंधित आरएलएनजी गैस आपूर्ति में वर्तमान में 35 प्रतिशत तक की कटौती की जा रही है। संकेत मिल रहे हैं कि निकट भविष्य में इस कोटे में और भी अधिक कटौती की जा सकती है। ईंधन की कमी के कारण कारखानों को चलाना अब टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। कांच श्रमिक संगठनों के अनुसार, गैस संकट का सबसे बुरा असर उत्पादन प्रक्रिया और रोजगार पर पड़ा है। चूड़ी निर्माण करने वाले 85 कारखाने, 25 माउथ ब्लोइंग इकाइयां और 15 से अधिक बोतल निर्माण इकाइयां वर्तमान में संकट के दौर से गुजर रही हैं। उत्पादन घटने के कारण अधिकांश कारखानों ने एक शिफ्ट कम कर दी है। इसके साथ ही कामगारों की ड्यूटियां भी काटी जा रही हैं, जिससे दैनिक वेतनभोगी मजदूरों की आय आधी रह गई है। उत्पादन प्रक्रिया में लगातार हो रही कटौती के कारण श्रमिक बस्तियों में सन्नाटा पसरने लगा है और कामगारों के परिवारों के समक्ष भविष्य की चिंता गहरा गई है।
उद्यमियों का कहना है कि गैस की बढ़ती कीमतों और घटती आपूर्ति के बीच फैक्ट्रियों को पूर्ण क्षमता पर चलाना नामुमकिन हो गया है। अब सभी की निगाहें सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के हस्तक्षेप पर टिकी हैं।
चूड़ी श्रमिक संगठन की ओर से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक मांग पत्र दिया गया है। समुचित कार्रवाई के लिए मांग पत्र शासन को भेजा जा रहा है।
यशवंत कुमार, सहायक श्रमायुक्त