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कांच उद्योग को एक साल बाद भी नहीं लगे पंख

Tue, 26 May 2015 11:13 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे के एक साल बाद भी कांच उद्योग को उन्नति के पंख नहीं लग सके। मोदी सरकार से उद्योग जगत को काफी उम्मीद थीं लेकिन वह अभी तक अधूरी हैं। वहीं उद्योग निदेशालय की पहल को अफसरों ने पलीता लगा दिया।
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देश के पुराने ब्रांडेड आइटमों को नए सिरे से लांच करने के साथ देश भर में परंपरागत उद्योगों से हटकर नए उद्योगों के सृजन को पीएम नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम जोर-शोर से लांच किया था। मेक इन इंडिया कार्यक्रम लांच करने के पीछे मोदी की मंशा थी कि नए उद्योगों के सृजन से हजारों युवाओं जो अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी बेरोजगार घूम रहे हैं, उन्हें नए सेक्टरों में रोजगार मिलेगा, जिससे देश की तरक्की होगी। यही नहीं उद्योग निदेशालय द्वारा सभी जिला उद्योग केंद्रों के माध्यम से त्वरित आर्थिक विकास के लिए नए उद्योगों के सृजन के संबंध में प्रस्ताव भी मांगे गए। मेक इन इंडिया कार्यक्रम को लेकर जिस तरह शोर उठा, उसकी अपेक्षा धरातल पर कोई ठोस प्लानिंग नजर नहीं आई। मोदी सरकार के एक साल के कार्यकाल में कांच उद्योग को उन्नति के पंख नहीं लग सके।

बाक्स--
चार माह में एक प्रस्ताव भी नहीं भेजा
मेक इन इंडिया कार्यक्रम को तेजी से लागू करने के लिए उद्योग निदेशालय द्वारा फरवरी माह में सभी अपर आयुक्त, संयुक्त आयुक्त एवं उपायुक्त उद्योग को पत्र जारी कर औद्योगिक विकास के लिए अपने-अपने क्षेत्र में प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय को भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन चार माह में जिला उद्योग केन्द्र द्वारा एक भी प्रस्ताव उद्योग निदेशालय को नहीं भेजा गया।
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राजकुमार मित्तल ने कहा कि कांच उद्योग के पहले भी बुरे दिन थे, आज भी बुरे दिन हैं। अच्छे दिन आने का अभी इंतजार है। कांच उद्योग में तमाम दुश्वारियां हैं, सुनने वाला कोई नहीं है।

अभिषेक मित्तल चंचल ने कहा मेक इन इंडिया कार्यक्रम का कांच उद्योग पर अभी तक कोई असर नजर नहीं आया है। केंद्र सरकार द्वारा उद्यमियों को कोई राहत नहीं दी गई। चाइना के माल पर रोक न लगने से निर्यात को बढ़ावा नहीं मिल सका।

हेमंत अग्रवाल बोले, मेक इन इंडिया कार्यक्रम से उम्मीद तो बहुत थी, लेकिन आजतक धरातल पर कुछ देखने को नहीं मिला। उद्यमियों की कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। केंद्र सरकार को चाहिए मेक इन इंडिया कार्यक्रम के संबंध में उद्यमियों को बुलाकर वार्ता की जाए, तभी इस दिशा में कोई सफलता मिल सकती है।
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