अहंकार त्यागने वाला भगवान को प्राप्त करता है
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श्री हनुमज्जयंती महोत्सव समिति की ओर से श्रीरामलीला मैदान में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन अयोध्या धाम से आए जगद्गुरुरामानुजाचार्य ने कहा कि जो मनुष्य अपने जीवन में अहंकार को सर्वथा त्याग कर निर्मल जीवन जीता है, वही भक्ति व भगवान दोनों को प्राप्त करता है।
श्रीराम कथा मर्मज्ञ पीठाधीश्वर ने कहा कि आज समाज में जो अशांति दिख रही है, परस्पर अभाव दिख रहा है, वह सब इसलिए है कि व्यक्ति का स्वभाव निर्मल न होकर कपटपूर्ण है। धराचार्ज महाराज ने श्रीराम-सीता के विवाह के प्रसंग को बताते हुए कहा कि वैदिक परंपरा से अलग होकर समाज अपनी इच्छानुसार अपने पुत्र-पुत्रियों का विवाहोत्सव मनाते हैं। भावी पीढ़ी में वैदिक सनातन परंपरा का ह्रास है। धर्म की रक्षा संस्कारों की रक्षा से ही संभव है। कथा के अंत में मुख्य यजमान नारदानंद गर्ग ने श्रीरामचरित मानस की आरती उतारी।